सऊदी अरब में एक बेहद दुर्लभ खगोलीय घटना होने जा रही है। पवित्र काबा के ठीक ऊपर सूर्य देव आने वाले हैं, जिससे वहां मौजूद चीजों की परछाई गायब हो जाएगी। यह दुर्लभ संयोग बुधवार, 27 मई 2026 को मक्का के समय के अनुसार दोपहर 12:18 बजे होगा। इस बार यह घटना इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि यह ईद-उल-अजहा या अराफात के दिन के आसपास हो रही है, जो लगभग 65 से 100 साल में एक बार होता है।

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कब और किस समय होगी यह दुर्लभ खगोलीय घटना?

यह खगोलीय घटना बुधवार, 27 मई 2026 को मक्का के स्थानीय समयानुसार दोपहर 12:18 बजे होगी। साल में वैसे तो सूरज दो बार काबा के ठीक ऊपर आता है, जिसमें पहला मई के आखिर में और दूसरा 16 जुलाई को होता है। लेकिन इस साल मई वाली घटना बेहद खास है क्योंकि यह अराफात के दिन या ईद-उल-अजहा के साथ मिल रही है। इससे पहले ऐसा संयोग साल 1993 में देखा गया था और अब अगली बार यह साल 2059 में दिखाई देने की उम्मीद है। सऊदी प्रेस एजेंसी के इंग्लिश अकाउंट ने भी इस दुर्लभ घटना की जानकारी साझा की है।

बिना किसी टूल के किबला की सही दिशा जानने का मौका

जेद्दा एस्ट्रोनॉमी सोसाइटी के अध्यक्ष इंजीनियर माजिद अबू जहरा ने बताया कि इस घटना को ‘सोलर जेनिथ’ कहा जाता है जो पृथ्वी के अक्षीय झुकाव और मक्का के अक्षांश के कारण होती है। जब सूरज काबा के ठीक ऊपर होगा, तो वहां किसी भी खड़ी चीज की कोई परछाई नहीं बनेगी। दुनिया भर के मुसलमान इस समय का उपयोग करके बिना किसी आधुनिक उपकरण के अपने घर पर ही किबला यानी नमाज पढ़ने की दिशा का बिल्कुल सही पता लगा सकते हैं। इसके लिए जमीन पर एक लकड़ी सीधी खड़ी करनी होगी और उस समय उसकी परछाई के ठीक विपरीत दिशा ही किबला की दिशा होगी।

मौसम विभाग ने गर्मी को लेकर क्या कहा?

सऊदी अरब के राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (NCM) ने इस बारे में जरूरी जानकारी दी है। विभाग ने साफ किया है कि यह एक प्राकृतिक और नियमित रूप से होने वाली खगोलीय घटना है। इसके कारण तापमान में कोई असामान्य या बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होती है। मौसम में होने वाले बदलाव कई अन्य जलवायु कारकों पर निर्भर करते हैं, इसलिए लोगों को गर्मी बढ़ने जैसी आशंकाओं से परेशान होने की जरूरत नहीं है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

काबा के ऊपर सूरज आने पर किबला की दिशा कैसे तय करें?

दोपहर 12:18 बजे मक्का समय के अनुसार जमीन पर एक सीधी लकड़ी खड़ी करें। इस लकड़ी की जो परछाई बनेगी, उसकी ठीक विपरीत यानी उल्टी दिशा ही पवित्र काबा की सही दिशा होगी।

यह घटना इतने सालों में एक बार क्यों खास मानी जा रही है?

सूरज का सीधा काबा के ऊपर आना साल में दो बार होता है, लेकिन इसका ईद-उल-अजहा या अराफात के दिन पड़ना 65 से 100 साल में एक बार ही होता है। इससे पहले ऐसा संयोग 1993 में बना था।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.