Hormuz Crisis: ईरान-अमेरिका की लड़ाई से बढ़ा तेल का दाम, Brent 104 डॉलर के पार, कुवैत ने शिपमेंट पर लगाया रोक

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया के तेल बाज़ार को पूरी तरह हिला दिया है. Strait of Hormuz में मची इस खींचतान की वजह से तेल की सप्लाई रुक रही है और दाम तेज़ी से बढ़ रहे हैं. इस संकट का सीधा असर अब ग्लोबल मार्केट और तेल की कीमतों पर दिखने लगा है.

Strait of Hormuz में क्या चल रहा है और क्यों है तनाव?

ईरान ने 28 फरवरी 2026 से इस समुद्री रास्ते को काफी हद तक बंद कर दिया था. अमेरिका और इसराइल की सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की IRGC ने जहाजों के रास्ते में रोक लगाई और कम से कम 21 हमलों की जानकारी मिली है. वहीं अमेरिका ने भी 13 अप्रैल 2026 से यहाँ नाकाबंदी शुरू कर दी है. अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) के मुताबिक, समुद्र में बिछाई गई माइन्स को हटाने में 6 महीने तक का समय लग सकता है, और यह काम युद्ध खत्म होने के बाद ही शुरू होगा.

तेल की कीमतों और कुवैत पर क्या असर हुआ है?

बाज़ार में तेल की सप्लाई घटने की वजह से Brent क्रूड की कीमत 104 डॉलर और WTI करीब 95 डॉलर तक पहुँच गया है. पिछले चार दिनों से लगातार कीमतें बढ़ रही हैं. इस संकट के बीच कुवैत ने 20 अप्रैल 2026 को अपने कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम के शिपमेंट पर ‘फोर्स मेज्योर’ (Force Majeure) घोषित कर दिया है. इसका मतलब है कि असामान्य हालातों की वजह से कुवैत अपनी डिलीवरी की शर्तों को पूरा करने में असमर्थ है.

विवरण जानकारी
Brent क्रूड की कीमत करीब 104 डॉलर प्रति बैरल
WTI क्रूड की कीमत करीब 95 डॉलर प्रति बैरल
कुवैत फोर्स मेज्योर तारीख 20 अप्रैल 2026
अमेरिकी नाकाबंदी की शुरुआत 13 अप्रैल 2026
ईरानी नाकाबंदी की शुरुआत 28 फरवरी 2026
कीमतों का रुझान 4 दिनों से लगातार बढ़त
ईरानी हमलों की संख्या 21 कन्फर्म हमले

Kpler जैसी एनालिटिक्स फर्म का कहना है कि इस रुकावट का पूरा असर अभी तक कीमतों में नहीं आया है. दुनिया अब इस बात पर नज़र रखे हुए है कि यह संकट कब तक चलेगा और तेल की मांग को संतुलित करने के लिए कीमतें और कितनी ऊपर जाएँगी. पाकिस्तान की मदद से शांति वार्ता की कोशिशें जारी हैं, लेकिन ईरान और अमेरिका के बीच गतिरोध बना हुआ है.