अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) के फिर से खुलने की उम्मीद जगी है। लेकिन शिपिंग इंडस्ट्री की बड़ी संस्था BIMCO ने चेतावनी दी है कि यहाँ से जहाजों का गुज़रना अब भी जोखिम भरा है। हालांकि कुछ इलाकों से बारूदी सुरंगें हटा दी गई हैं, पर खतरा पूरी तरह टला नहीं है।

अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता

18 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता (MoU) लागू हुआ। इस समझौते का मकसद जंग को खत्म करना और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस फैसले का स्वागत किया और कहा कि इससे ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकाबंदी खत्म होगी।

BIMCO ने जताई चिंता

BIMCO के सुरक्षा अधिकारी याकूब लार्सन ने बताया कि शिपिंग इंडस्ट्री के लिए हालात अब भी बहुत उतार-चढ़ाव वाले और खतरनाक हैं। उन्होंने साफ कहा कि भले ही कुछ तटीय इलाके बारूदी सुरंगों से मुक्त हो गए हैं, लेकिन ये रास्ते इतने पर्याप्त नहीं हैं कि यहाँ से सामान्य तौर पर जहाजों का आना-जाना शुरू हो सके।

BIMCO ने यह भी कहा कि अमेरिका और ईरान की तरफ से सुरक्षित रास्तों और सही समय की जानकारी नहीं मिल रही है, जिससे कंपनियों को परेशानी हो रही है।

ईरान और सऊदी अरब का रुख

  • ईरान: ईरानी टीवी ने बताया कि जहाजों को इस रास्ते से निकलने के लिए ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के साथ तालमेल करना होगा।
  • सऊदी अरब: सऊदी सरकार ने इस समझौते का स्वागत किया है। सऊदी ने उम्मीद जताई है कि समुद्री रास्ता फिर से सुरक्षित हो जाएगा और पहले की तरह व्यापार शुरू होगा।

कब तक ठीक होंगे हालात

जानकारों का मानना है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में ईरान द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंगों को पूरी तरह हटाने में हफ़्तों या महीनों का समय लग सकता है। शिपिंग और तेल कंपनियों को फिर से भरोसा करने में वक्त लगेगा। अनुमान है कि समुद्री यातायात पूरी तरह सामान्य होने में साल 2027 तक का समय लग सकता है। इस काम के लिए ग्रीस, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देश भी मदद के लिए तैयार हैं।