हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में पिछले 89 दिनों से जारी रुकावटों के कारण दुनिया भर में ईंधन की भारी कमी का संकट मंडराने लगा है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय और ऊर्जा संस्थानों ने चेतावनी दी है कि अगर इस समुद्री मार्ग पर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो इस गर्मी में कई देशों को तेल और गैस की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है। इस संकट की वजह से जहाजों का बीमा खर्च 15 प्रतिशत तक बढ़ गया है और वैश्विक तेल बाजार के जुलाई तक रेड जोन में जाने की आशंका जताई जा रही है।

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हॉर्मुज जलमार्ग बंद होने से तेल सप्लाई पर क्या असर पड़ रहा है?

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते से जहाजों की आवाजाही ठप होने के कारण वैश्विक बाजार में हर दिन लगभग 1.4 करोड़ बैरल तेल की आपूर्ति कम हो गई है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता है।

  • जहाजों की रुकी रफ्तार: पिछले 89 दिनों से यह मार्ग प्रभावित है और पिछले 24 घंटों में केवल चार जहाजों ने अपने ट्रांसपोंडर बंद करके इसे पार किया है।
  • लगा लंबा जाम: वर्तमान में 250 से अधिक व्यावसायिक जहाज इस जलडमरूमध्य को पार करने का इंतजार कर रहे हैं।
  • बीमा खर्च में बढ़ोतरी: तनाव के कारण तेल ले जाने वाले टैंकरों के बीमा प्रीमियम में लगभग 15 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

भारत की तेल आपूर्ति और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या असर होगा?

इस संकट के बीच भारत सरकार पूरी मुस्तैदी से काम कर रही है। भारत का नौवहन मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय और उर्वरक मंत्रालय मिलकर एक गोपनीय रणनीति के तहत भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित कर रहे हैं। वर्तमान में 13 भारतीय ध्वज वाले जहाज इस क्षेत्र में मौजूद हैं और वे सुरक्षित रूप से मार्ग पार कर रहे हैं।

हालांकि, भारत पेट्रोलियम (BPCL) के निदेशक राज कुमार दुबे ने चेतावनी दी है कि यदि यह वैश्विक ऊर्जा संकट इसी तरह जारी रहता है, तो आने वाले समय में भारत के घरेलू बाजार में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

संकट को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस जलमार्ग से अमेरिकी नाकेबंदी हटाने और ईरान पर जल्द ही कोई अंतिम फैसला लेने की उम्मीद की जा रही है। इस संकट को सुलझाने के लिए वाशिंगटन और तेहरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता से बातचीत चल रही है, हालांकि अभी तत्काल समझौते की संभावना केवल 50-50 प्रतिशत ही बताई जा रही है।

दूसरी तरफ, ईरान ने साफ तौर पर कहा है कि वह हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण नहीं छोड़ेगा। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान की ‘पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ पर अवैध वसूली के आरोप लगाकर प्रतिबंध लगा दिए हैं और ओमान को भी इस मामले में ईरान का सहयोग न करने की चेतावनी दी है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

हॉर्मुज जलडमरूमध्य संकट कब शुरू हुआ था और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

यह संकट फरवरी 2026 के अंत में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद तेहरान द्वारा मार्ग पर प्रतिबंध लगाने से शुरू हुआ। यह मार्ग वैश्विक तेल और एलएनजी व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता है।

क्या भारत को इस मार्ग के बंद होने से नुकसान हो रहा है?

वर्तमान में भारत सरकार मंत्रालयों के आपसी समन्वय और गोपनीय रणनीति के जरिए सुरक्षित रूप से अपनी ऊर्जा आपूर्ति जारी रखे हुए है, लेकिन लंबे समय तक संकट रहने पर देश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.