कुवैत ने Strait of Hormuz को बंद करने की ईरान की कोशिशों की कड़ी निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया है। कुवैत सरकार ने साफ किया है कि समुद्री रास्तों को रोकना वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। इस तनाव के बीच Kuwait Petroleum Corporation (KPC) ने कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती करने और force majeure लागू करने का फैसला लिया है। कुवैत ने स्पष्ट किया है कि वह अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को बनाए रखने के अपने रुख पर कायम है।

कुवैत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर क्या कहा?

लंदन में International Maritime Organization (IMO) की बैठक में कुवैत के राजदूत Bader Al-Munaikh ने ईरान के कदमों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि Strait of Hormuz और Bab al-Mandab जैसे रास्तों को बाधित करना समुद्री सुरक्षा और स्थिरता को खतरे में डालता है। कुवैत विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. मदौस अल-रशीदी के अनुसार, ईरान को इस बंदी के कारण हुए नुकसान के लिए कुवैत और अन्य खाड़ी देशों को मुआवजा देना होगा। यह कार्रवाई UN Charter और अंतरराष्ट्रीय समझौतों के खिलाफ है।

तेल की कीमतों और सप्लाई पर क्या असर हुआ?

मार्च की शुरुआत से ही Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप है, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है। ईरान ने दावा किया है कि इस रास्ते से गुजरने वाले सभी जहाजों को तेहरान से अनुमति लेनी होगी। इस संकट की वजह से तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है।

विवरण ताजा आंकड़े और प्रभाव
कुवैती कच्चे तेल की कीमत 143 डॉलर प्रति बैरल के पार
ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा
वैश्विक तेल सप्लाई दुनिया का 20% उत्पादन इसी रास्ते से गुजरता है
सल्फर एक्सपोर्ट दुनिया का 45% हिस्सा प्रभावित
कुवैत का उत्पादन फरवरी में 2.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन था

कुवैत में सुरक्षा की स्थिति और क्षेत्रीय असर

क्षेत्रीय तनाव का असर कुवैत की सीमाओं पर भी दिख रहा है। 18 मार्च को कुवैत की एयर डिफेंस ने सात हमलावर ड्रोन मार गिराए और मिसाइल हमलों को नाकाम किया। सरकार ने साफ़ कहा है कि देश की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा। इस बंदी की वजह से इराक और कतर ने भी अपने तेल उत्पादन में कमी की है। International Energy Agency (IEA) ने इसे इतिहास की सबसे बड़ी रुकावट बताया है और रणनीतिक भंडार से 400 मिलियन बैरल तेल जारी किया है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.