हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद होने के बाद पूरी दुनिया में खाद और खेती से जुड़े सामानों का बड़ा संकट खड़ा हो गया है. खाड़ी देश दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख फर्टिलाइजर (खाद) का 20 प्रतिशत हिस्सा सप्लाई करते हैं. इस रास्ते के बंद होने से हर महीने लाखों टन खाद बाजार तक नहीं पहुंच पा रही है. मौजूदा हालात को देखते हुए 13 मार्च 2026 तक 23 से ज्यादा जहाज खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिनमें 5 लाख टन से ज्यादा यूरिया और अन्य रसायन लदा है.

खाद की कीमतों में कितना आया उछाल

इस समुद्री रास्ते से दुनिया का 45 से 46 प्रतिशत यूरिया ट्रेड होता है. कतर अकेले पूरी दुनिया की 10 प्रतिशत मांग पूरी करता है. कतर एनर्जी ने हाल के हमलों के बाद अपने प्लांट का काम रोक दिया है और फोर्स मेज्योर (Force Majeure) लागू कर दिया है. सप्लाई रुकने के कारण खाद के दाम बहुत तेजी से ऊपर जा रहे हैं.

  • साउथईस्ट एशिया में यूरिया के दाम 40 प्रतिशत बढ़कर 700 डॉलर प्रति टन के पार चले गए हैं.
  • मिस्र के यूरिया के दाम में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है और यह 625 डॉलर प्रति टन हो गया है.
  • कुल मिलाकर विवाद शुरू होने के बाद से खाद की कीमतों में 10 से 30 प्रतिशत की तेजी आई है.

क्या है नया नियम और जहाजों की स्थिति

ईरान ने यह साफ कर दिया है कि अब इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी जहाजों को सीधे ईरानी नौसेना (Iranian Navy) के साथ कॉर्डिनेट करना होगा. इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) ने 13 मार्च को एक खास बैठक भी बुलाई है ताकि समुद्र में सुरक्षा के मुद्दे पर बात हो सके.

स्थिति इतनी संवेदनशील है कि जुबैल से निकले एक जहाज को खुद को सुरक्षित रखने के लिए अपना सिग्नल बदलकर ‘CHINA OWNER&CREW’ करना पड़ा ताकि वह बिना रोक-टोक के निकल सके. वर्तमान में खाड़ी में फंसे 23 जहाजों में 5 लाख 30 हजार टन यूरिया और 3 लाख 58 हजार टन सल्फर फंसा हुआ है.

भारत और अन्य देशों पर क्या होगा असर

खाड़ी देशों से आने वाली गैस और नाइट्रोजन पर भारत, चीन, ब्राजील, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देश बहुत अधिक निर्भर हैं. कतर से गैस सप्लाई रुकने के कारण भारत में कम से कम एक अमोनिया प्लांट बंद हो गया है और तीन अन्य प्लांट में उत्पादन कम कर दिया गया है.

जानकारों का कहना है कि उत्तरी अमेरिका में बुवाई का सीजन शुरू होने वाला है. ऐसे में अगर 20 मार्च तक यह रास्ता नहीं खुला, तो खेती पर बुरा असर पड़ेगा और पूरी दुनिया में खाने-पीने की चीजों के दाम तेजी से बढ़ेंगे. हर महीने लगभग 13 लाख टन से ज्यादा खाद इस रास्ते से गुजरती है और अब इसके 30 से 40 लाख टन तक पहुंचने की उम्मीद खत्म हो गई है.

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.