संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की संस्था UNCTAD ने चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते तनाव की वजह से दुनिया भर में ऊर्जा, खाद और खाने-पीने की चीजों का बाजार खतरे में है। रिपोर्ट के अनुसार, इस समुद्री रास्ते में पैदा हुए संकट का असर व्यापार और आर्थिक स्थिरता पर पड़ रहा है। खाद की सप्लाई रुकने से आने वाले समय में दुनिया भर में खाद्य सुरक्षा का बड़ा संकट पैदा हो सकता है, जिससे आम जनता के लिए पेट भरना मुश्किल हो जाएगा।

📰: Kuwait Airspace Violation: कुवैत के हवाई क्षेत्र में घुसपैठ पर अंतरराष्ट्रीय संस्था सख्त, हमलों की कड़े शब्दों में निंदा

इस संकट से खाद और खेती पर क्या असर पड़ रहा है?

होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होने वाली सप्लाई रुकने से खाद की कीमतों में भारी उछाल आया है। खाड़ी क्षेत्र से होने वाला यूरिया का निर्यात काफी हद तक ठप हो गया है, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है। इसकी वजह से भारत जैसे कृषि प्रधान देशों पर बुरा असर पड़ सकता है जो अपनी खाद की जरूरत के लिए इन देशों पर निर्भर रहते हैं।

खाद का प्रकार कीमत में बदलाव
यूरिया (Urea) 482.5 डॉलर से बढ़कर 720 डॉलर प्रति टन
अमोनिया (Ammonia) कीमतों में 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी
सप्लाई चैन वैश्विक स्तर पर 33 प्रतिशत की गिरावट

व्यापार और आम आदमी पर होने वाले असर की मुख्य बातें

इस संकट की वजह से जहाजों की आवाजाही लगभग खत्म होने के कगार पर है। इसका सीधा असर रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर दिखाई देने लगा है।

  • होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले टैंकरों की संख्या में 90 प्रतिशत से ज्यादा की कमी आई है।
  • तेल ले जाने वाले टैंकरों का किराया 90 प्रतिशत तक महंगा हो गया है।
  • खाड़ी देशों को निर्यात बंद होने से लगभग 50 अरब डॉलर से ज्यादा का आर्थिक नुकसान हुआ है।
  • बीमा कंपनियों ने जहाजों के लिए वॉर रिस्क प्रीमियम बढ़ा दिया है जिससे सामान लाना महंगा हो गया है।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह संकट जून तक चला तो दुनिया भर में भुखमरी की समस्या बढ़ सकती है।

UN और विशेषज्ञों का इस स्थिति पर क्या कहना है?

FAO के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो (Maximo Torero) ने चेतावनी दी है कि मिडल ईस्ट में यूरिया की कीमतें मार्च के पहले हफ्ते में ही 19 से 28 प्रतिशत तक बढ़ गई थीं। UN महासचिव ने इस संकट से निपटने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स बनाई है जो खाद के व्यापार और मानवीय मदद को सुरक्षित रास्तों से पहुंचाने के लिए काम करेगी। यह संकट 2022 के यूक्रेन संकट से भी बड़ा बताया जा रहा है क्योंकि इसमें ईंधन, खाद और गैस तीनों की सप्लाई एक साथ प्रभावित हुई है।