अमेरिका और ईरान के बीच तनाव इतना बढ़ गया है कि Strait of Hormuz लगभग पूरी तरह बंद हो गया है। दोनों देशों ने एक-दूसरे के जहाजों को रोका है और अब अमेरिका ने चेतावनी दी है कि वह हमला करने वाले जहाजों को नष्ट कर देगा। इस विवाद की वजह से दुनिया भर में सामान की सप्लाई और तेल की कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है।

अमेरिका और ईरान के बीच क्या चल रहा है?

अमेरिका ने 12 अप्रैल को Strait of Hormuz में जहाजों के आने-जाने पर रोक लगा दी थी। जवाब में ईरान ने भी पाबंदियां लगा दीं और 22 अप्रैल को IRGC ने दो बड़े कंटेनर जहाजों, MSC-Francesca और Epaminondas को जब्त कर लिया। अमेरिका के रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने साफ कहा है कि अगर ईरान के जहाज समुद्र में माइन बिछाने की कोशिश करेंगे, तो अमेरिकी सेना उन्हें तुरंत नष्ट कर देगी। इसके अलावा अमेरिकी खजाने विभाग ने ईरान से जुड़े डिजिटल वॉलेट से करीब 344 मिलियन डॉलर फ्रीज कर दिए हैं।

आम लोगों और शिपिंग पर इसका क्या असर होगा?

इस विवाद की वजह से समुद्र में जहाजों की आवाजाही बहुत कम हो गई है। आंकड़ों के मुताबिक, 24 अप्रैल तक सिर्फ 5 जहाज ही इस रास्ते से गुजर पाए। इस वजह से समुद्री बीमा का खर्चा बहुत बढ़ गया है और करीब 20 हजार नाविक समुद्र में ही फंस गए हैं। एशिया के उन देशों को सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है जो बाहर से सामान मंगवाते हैं क्योंकि अब ट्रांसपोर्ट का खर्चा बढ़ गया है और सामान पहुंचने में देरी हो रही है।

बाकी दुनिया और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का क्या कहना है?

संयुक्त राष्ट्र (UN) के चीफ एंटोनियो गुटेरेस ने तनाव कम करने और बातचीत करने की अपील की है। वहीं IMO के चीफ ने जहाजों को पकड़ने और उन पर हमले करने की कड़ी निंदा की है। पाकिस्तान इस समय दोनों देशों के बीच बातचीत कराने की कोशिश कर रहा है। दूसरी तरफ चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र में उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है जिसमें ईरान के हमलों को रोकने और सुरक्षा बढ़ाने की बात कही गई थी।