Strait of Hormuz में हालात बहुत तनावपूर्ण हो गए हैं। यहाँ से गुजरने वाले लगभग एक अरब बैरल तेल के नुकसान का खतरा मंडरा रहा है, जिससे पूरी दुनिया में तेल की मांग और सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य भिड़ंत की वजह से इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर भारी तनाव है।

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अमेरिका और ईरान के बीच क्या है पूरा विवाद

अमेरिका ने 13 अप्रैल 2026 से ईरान के बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी कर दी है। राष्ट्रपति Donald Trump ने आदेश दिया है कि US Navy की मंजूरी के बिना कोई भी जहाज इस रास्ते से नहीं गुजरेगा। वहीं ईरान की IRGC ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका नाकेबंदी नहीं हटाता, तब तक Strait of Hormuz बंद रहेगा। ईरान ने चेतावनी दी है कि जो भी जहाज पास आएगा, उसे दुश्मन का मददगार मानकर निशाना बनाया जाएगा। इस बीच पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता के लिए मध्यस्थता कर रहा है। जर्मनी ने भी ऐलान किया है कि वह इस रास्ते से बारूदी सुरंगें हटाने के लिए अपने जहाज भेजेगा।

तेल की सप्लाई और अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा

Strait of Hormuz दुनिया के कुल तेल और गैस की लगभग एक-पांचवीं सप्लाई का रास्ता है। इस रास्ते के बंद होने से वैश्विक बाजार में तेल की भारी किल्लत हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने अपनी कमाई के लिए एक ‘टोल बूथ’ सिस्टम शुरू किया है, जिसमें कुछ जहाजों से गुजरने के लिए 2 मिलियन डॉलर तक की फीस ली जा रही है। अमेरिका ने ऊर्जा कीमतों को स्थिर रखने के लिए Jones Act छूट को 90 दिनों के लिए बढ़ा दिया है।

विवरण डेटा और जानकारी
संभावित तेल नुकसान लगभग 1 अरब बैरल
बाजार से हटा तेल 500 मिलियन बैरल से ज्यादा
वैश्विक सप्लाई हिस्सेदारी कुल सप्लाई का 1/5 हिस्सा
ईरान के निर्यात पर असर करीब 80% निर्यात प्रभावित
जहाजों से लिया जा रहा टोल कुछ जहाजों से 2 मिलियन डॉलर तक
समुद्र में मौजूद तेल 160 से 183 मिलियन बैरल
नाकेबंदी की तारीख 13 अप्रैल 2026