28 मार्च 2026 को व्हाइट हाउस के अधिकारियों और समाचार एजेंसियों के बयानों के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी टीम हॉरमुज जलडमरूमध्य में ईरान की किसी भी संभावित प्रतिक्रिया से निपटने के लिए ‘पूरी तरह तैयार’ हैं। वे ‘आश्वस्त’ हैं कि यह जलडमरूमध्य ‘जल्द ही फिर से खोल दिया जाएगा’। वहीं, ईरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जिससे इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर तनाव बढ़ गया है।

अमेरिका का क्या कहना है?

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान में जमीनी सेना भेजने की योजना नहीं बना रहे हैं, लेकिन उन्होंने किसी भी अन्य विकल्प को खारिज नहीं किया है। अधिकारी ने यह भी कहा कि ट्रंप ईरानियों की बात सुनने को तैयार हैं, हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि वे मौजूदा स्थिति को स्वीकार नहीं करते हैं तो ‘पहले से कहीं अधिक जोरदार हमले’ हो सकते हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ‘एक अंतहीन युद्ध’ से बचना चाहते हैं और बातचीत के जरिए रास्ता तलाश रहे हैं। उन्होंने संभावित सैन्य कार्रवाई की अवधि चार से छह सप्ताह होने का अनुमान लगाया।

27 मार्च 2026 को ट्रंप ने मजाक में हॉरमुज जलडमरूमध्य को ‘ट्रंप जलडमरूमध्य’ कहा था, हालांकि उन्होंने तुरंत सुधार किया और इसके खुलने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के साथ बातचीत चल रही है, जिसे तेहरान ने नकार दिया। 26 मार्च 2026 को, ट्रंप ने ईरानी अनुरोध पर ईरान की ऊर्जा सुविधाओं को नष्ट करने की अपनी धमकी को दस दिनों के लिए निलंबित कर दिया था। उन्होंने नाटो सहयोगियों के हॉरमुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने के लिए सैन्य सहायता देने से इनकार करने पर अपनी नाराजगी भी व्यक्त की।

ईरान की क्या प्रतिक्रिया है?

28 मार्च 2026 को, एक वरिष्ठ ईरानी सुरक्षा अधिकारी ने चेतावनी दी कि हॉरमुज जलडमरूमध्य में किसी भी अमेरिकी सैन्य अभियान से इसे ‘अनिश्चित काल के लिए’ बंद कर दिया जाएगा। ईरानी सशस्त्र बलों के प्रवक्ता, मेजर जनरल शिकारजी ने 28 मार्च 2026 को जोर देकर कहा कि ईरान युद्ध समाप्त करने की शर्तें तय करेगा। उन्होंने बताया कि मौजूदा सैन्य अभियान ईरान की क्षमताओं का न्यूनतम स्तर है, और भविष्य में विशेषकर हॉरमुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण के माध्यम से व्यापक वृद्धि की संभावना है।

इससे पहले, 22 मार्च 2026 को, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने घोषणा की थी कि हॉरमुज जलडमरूमध्य उन सभी देशों के जहाजों के लिए खुला रहेगा, सिवाय उन देशों के जिन्हें उन्होंने ईरान के क्षेत्र पर ‘आक्रमणकारी’ बताया था।

अन्य देशों की भूमिका क्या है?

पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की मेजबानी करने की अपनी तत्परता की घोषणा की है। वहीं, भारत के विदेश मंत्रालय ने बताया कि ईरान हॉरमुज जलडमरूमध्य के माध्यम से जहाजों के सुरक्षित मार्ग के लिए कोई शुल्क नहीं मांग रहा है। इस तरह, इन देशों की भूमिका मध्यस्थता और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण हो सकती है।

Sushma Kumari

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