यमन के हूती विद्रोहियों ने 20 जुलाई 2026 से बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य में सऊदी अरब के लिए समुद्री नाकेबंदी का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को चेतावनी दी गई है, जिससे एशियाई देशों को होने वाली तेल की आपूर्ति पर बड़ा खतरा पैदा हो गया है। हूतियों का कहना है कि यह कदम सऊदी अरब की तरफ से यमन में जारी घेराबंदी और हवाई हमलों के जवाब में उठाया गया है।

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समुद्री मार्ग पर संकट और असर

बाब अल-मंडेब दुनिया का एक बेहद महत्वपूर्ण रास्ता है जहाँ से वैश्विक व्यापार का 12 से 15 फीसदी हिस्सा गुजरता है। जून 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, हर दिन यहाँ से लगभग 7.4 मिलियन बैरल तेल का परिवहन होता है। सऊदी अरब अपने यनबू बंदरगाह से रोजाना 4 से 4.5 मिलियन बैरल तेल एशियाई बाजारों में भेजता है, जिस पर इस नाकेबंदी का सीधा असर पड़ रहा है। हूतियों का दावा है कि उन्होंने अब तक 6 जहाजों को रास्ता बदलने पर मजबूर किया है, जिसमें Rodos और Xin Long Yang जैसे बड़े जहाज शामिल हैं।

बढ़ सकती हैं तेल की कीमतें

शिपिंग कंपनियों के लिए अब स्वेज नहर या अफ्रीका का लंबा चक्कर काटना मजबूरी बन गया है। इस बदलाव से जहाजों का किराया, ईंधन का खर्च और बीमा की किस्तें बहुत बढ़ गई हैं। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर बाब अल-मंडेब और होर्मुज जलडमरूमध्य दोनों प्रभावित होते हैं, तो दुनिया में तेल की सप्लाई का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। सऊदी सरकार ने इस नाकेबंदी को समुद्री डकैती करार दिया है और इसे खोलने का संकल्प लिया है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी स्थिति पर नजर बनाए रखी है और जरूरत पड़ने पर कड़े कदम उठाने के संकेत दिए हैं।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com