यमन में होती है बड़ी घटना, हाउती ड्रोन हमले में सऊदी अरब का 1 करोड़ डॉलर का टैंक तबाह.

यमन के मारिब शहर से एक बड़ी सैन्य खबर सामने आ रही है जहाँ हाउती बलों ने एक ड्रोन हमले में सऊदी अरब के उपयोग वाले अमेरिकी निर्मित M1A2S Abrams टैंक को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। यह घटना 21 अगस्त 2026 को सामने आई जब हाउती मीडिया ने इस हमले से जुड़ा हुआ वीडियो फुटेज जारी किया। इस पूरी घटना ने एक बार फिर आधुनिक युद्ध में सस्ते ड्रोनों की ताकत और महंगे सैन्य उपकरणों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
सस्ते ड्रोन ने कैसे किया महंगे टैंक का शिकार
जारी किए गए फुटेज के अनुसार इस हमले में राजुम क्वाडकॉप्टर ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था जो अपने साथ एक घरेलू माइन यानी विस्फोटक लेकर उड़ रहा था। इस ड्रोन ने सटीक निशाना लगाते हुए सऊदी सेना के इस भारी-भरकम टैंक पर विस्फोटक गिरा दिया। खास बात यह है कि इस ड्रोन की अनुमानित कीमत मात्र 300 डॉलर यानी भारतीय मुद्रा के हिसाब से बहुत कम है, जबकि जिस अमेरिकी निर्मित M1A2S Abrams टैंक को निशाना बनाया गया उसकी कीमत लगभग 1 करोड़ डॉलर यानी करीब 83 करोड़ रुपये है।
ड्रोन से गिराए गए विस्फोटक के टैंक पर गिरते ही उसमें जोरदार धमाका हुआ। इस हमले के कारण टैंक के अंदर रखे हुए गोला-बारूद में आग लग गई जिससे एक बहुत बड़ा दूसरा धमाका हुआ और टैंक भीषण आग की चपेट में आ गया। हालांकि सैन्य विशेषज्ञों और शुरुआती रिपोर्ट्स का मानना है कि इस भयंकर विस्फोट के बावजूद टैंक के अंदर मौजूद क्रू यानी सैनिकों की जान बच गई होगी। इसकी वजह यह है कि एब्राम्स टैंक में एक विशेष ब्लोआउट कंपार्टमेंट होता है जो विस्फोट की ऊर्जा और आग को सैनिकों के केबिन से बाहर की तरफ डायवर्ट कर देता है ताकि अंदर बैठे लोग सुरक्षित रह सकें।
सऊदी सेना के टैंक की तकनीकी कमियां और अमेरिकी चेतावनी
सैन्य मामलों के जानकारों का कहना है कि रॉयल सऊदी लैंड फोर्सेस द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला यह M1A2S वेरिएंट अमेरिकी सेना द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले टैंकों से थोड़ा अलग होता है। सऊदी संस्करण में वे डिप्लिटेड यूरेनियम आर्मर पैनल नहीं होते हैं जो अमेरिकी सेना के टैंकों को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करते हैं। इसके अलावा यह घटना अमेरिकी सेना के एक जनरल द्वारा सितंबर 2024 में दिए गए उस बयान की याद दिलाती है जिसमें उन्होंने स्वीकार किया था कि एब्राम्स टैंक मूल रूप से ऊपर से होने वाले ड्रोन हमलों से बचाव के लिए डिजाइन नहीं किए गए थे।
इस पूरे मामले पर अभी तक सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन या रॉयल सऊदी लैंड फोर्सेस की तरफ से कोई भी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। साथ ही सोशल मीडिया पर सामने आए इस वीडियो साक्ष्य की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है। अगस्त 2026 के शुरुआती हफ्तों से ही मारिब क्षेत्र में हाउती विद्रोहियों की सैन्य गतिविधियों में काफी तेजी देखी गई है और वे लगातार सऊदी समर्थित सरकारी बलों को निशाना बना रहे हैं जिसके कारण दोनों पक्षों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है और कई जवान हताहत भी हुए हैं।