ईरान और इसराइल युद्ध में शामिल होने पर हूतियों के बीच छिड़ी बहस, सऊदी अरब के साथ शांति बचाने की भी है चिंता.

यमन के हूती गुट के भीतर इस समय इस बात को लेकर भारी चर्चा चल रही है कि उन्हें ईरान और इसराइल के बीच जारी युद्ध में किस हद तक शामिल होना चाहिए। अल जजीरा की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, हूती नेतृत्व दो गुटों में बंटा हुआ है। जहाँ एक गुट अपने सहयोगियों का साथ देने के लिए पूरी तरह युद्ध में उतरने के पक्ष में है, वहीं दूसरा गुट सावधानी बरतने की सलाह दे रहा है। यह बहस ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को जलडमरूमध्य खोलने के लिए मंगलवार रात तक की समयसीमा दी है।

हूती गुट के भीतर किन बातों को लेकर है विवाद?

हूतियों के बीच चल रही इस बहस के पीछे कई बड़े कारण हैं। एक गुट का मानना है कि उन्हें ईरान के साथ अपनी दोस्ती निभानी चाहिए और सैन्य कार्रवाई तेज करनी चाहिए। वहीं, दूसरा गुट यमन की सुरक्षा और आर्थिक स्थिति को लेकर चिंतित है। वे नहीं चाहते कि पिछले साल मार्च में हुए हमलों जैसा नुकसान दोबारा झेलना पड़े। साथ ही, वे सऊदी अरब के साथ चल रहे शांति समझौतों को भी खतरे में नहीं डालना चाहते हैं। ओमान की कोशिशों से अमेरिका और हूतियों के बीच मई 2025 में जो सहमति बनी थी, उसे बरकरार रखने की कोशिश की जा रही है।

क्षेत्र में युद्ध के ताजा हालात और मुख्य घटनाएं

पिछले 24 घंटों में खाड़ी क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है। हूतियों ने दावा किया है कि उन्होंने इसराइल के सैन्य ठिकानों पर क्रूज मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। क्षेत्र की अन्य प्रमुख घटनाओं की जानकारी नीचे दी गई है:

तारीख प्रमुख घटना
6 अप्रैल 2026 ईरान ने स्थायी युद्धविराम की मांग करते हुए नए शांति प्रस्ताव को खारिज किया।
6 अप्रैल 2026 अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमला किया, जिसमें 25 लोगों की मौत हुई।
6 अप्रैल 2026 हूतियों ने इसराइल के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान चलाने का दावा किया।
7 अप्रैल 2026 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दी गई डेडलाइन खत्म होने का समय।

आम आदमी और प्रवासियों पर क्या होगा इसका असर?

खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरान ने इसराइल के साथ-साथ पड़ोसी खाड़ी देशों की दिशा में भी मिसाइलें दागी हैं। अगर हूती गुट पूरी तरह से युद्ध में शामिल होता है, तो लाल सागर के समुद्री रास्तों पर संकट बढ़ सकता है। इससे सामान की आवाजाही महंगी हो सकती है और हवाई यात्राओं पर भी असर पड़ने की संभावना है। फिलहाल हूती नेता अब्दुल-मलिक अल-हूती ने ईरान के प्रति अपनी एकजुटता जताई है, लेकिन वे सऊदी अरब के साथ अपने पुराने समझौतों को भी बचाकर चलने की कोशिश कर रहे हैं।