यमन के हूती नेता Abdel-Malik al-Houthi ने 16 जुलाई 2026 को सऊदी अरब को लेकर एक बड़ी चेतावनी जारी की है। हूती नेता ने साफ कहा है कि अगर सऊदी अरब यमन में चल रहे सैन्य अभियानों में शामिल होता है, तो सऊदी की महत्वपूर्ण तेल और अन्य बुनियादी सुविधाएं उनके निशाने पर होंगी। यह बयान दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव को और ज्यादा बढ़ा रहा है।

तनाव की असली वजह

सऊदी अरब और हूतियों के बीच चल रहा 4 साल पुराना अनौपचारिक समझौता अब पूरी तरह टूटता हुआ दिख रहा है। 13 जुलाई 2026 को हूतियों ने सऊदी अरब पर मिसाइलें दागीं। हूतियों का कहना है कि यह हमला Sanaa International Airport पर हुए सऊदी बमबारी के जवाब में किया गया था। सऊदी अरब और यमन की सरकार का कहना है कि वे हवाई अड्डे पर इसलिए कार्रवाई कर रहे थे क्योंकि वहां ईरान से आ रहे एक विमान को हूती प्रतिनिधियों के साथ उतरने से रोकना था।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी चिंता

इस पूरे मामले में ईरान की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज है। जानकारों का कहना है कि ईरान ने हूतियों को निर्देश दिया है कि अगर अमेरिका ईरान की बिजली व्यवस्था पर हमला करता है, तो वे रेड सी यानी लाल सागर में तेल के रास्ते को बंद करने के लिए तैयार रहें। US State Department ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सऊदी अरब को अपना समर्थन देने की बात दोहराई है। वहीं, GCC के महासचिव Jasem Al Budaiwi ने भी हूतियों के हमलों की निंदा की है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सख्त कदम उठाने की अपील की है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.