यमन में सक्रिय ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने 20 जुलाई 2026 से सऊदी अरब के खिलाफ आधिकारिक तौर पर समुद्री नाकेबंदी लागू करने की घोषणा की है। इस फैसले ने पूरे क्षेत्र में युद्ध का खतरा बढ़ा दिया है और यमन में चल रहे मानवीय संकट को और भी गंभीर बना दिया है। हूती सैन्य प्रवक्ता Yahya Saree ने दावा किया कि यह कदम सऊदी अरब द्वारा यमन पर लगाए गए घेराबंदी के जवाब में उठाया गया है।
हमलों के बाद बदली जहाजों की दिशा
हूती विद्रोहियों ने 22 जुलाई को लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों Encelia और Layla पर हमले की पुष्टि की। सऊदी अधिकारियों ने जानकारी दी कि Encelia टैंकर जिज़ान बंदरगाह के पास हमले का शिकार हुआ और उसमें आग लग गई। इस घटना के बाद कई तेल टैंकरों ने सुरक्षा कारणों से अपना रास्ता बदल लिया है और वे अब स्वेज नहर की ओर जा रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और नागरिकों की चिंता
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने हूती कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और समुद्री डकैती करार दिया है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने चेतावनी दी कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी जहाज पर हमले का करारा जवाब दिया जाएगा। ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने इसके जवाब में अपनी रक्षा नीति को स्पष्ट किया है। इस स्थिति से यमन के आम नागरिक डरे हुए हैं। सना के एक शिक्षक Ammar Saleh ने बताया कि युद्ध की स्थिति में खाने-पीने का सामान मिलना और भी मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि यमन अपनी 90% खाद्य सामग्री आयात करता है। संयुक्त राष्ट्र ने भी क्षेत्र में भुखमरी बढ़ने और सहायता कम होने की चेतावनी दी है।
