Red Sea Attack: बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य में हूती मिसाइल हमला, दो पाकिस्तानी नागरिकों समेत तीन नाविकों की मौत.

Aanya11 August 20262 min read56 viewsYemen
Red Sea Attack: बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य में हूती मिसाइल हमला, दो पाकिस्तानी नागरिकों समेत तीन नाविकों की मौत.

लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाले बेहद अहम समुद्री मार्ग पर हूती विद्रोहियों ने एक बार फिर बड़ा हमला किया है। मंगलवार सुबह यानी 11 अगस्त 2026 को हुए इस भीषण मिसाइल हमले में एक कमर्शियल जहाज को निशाना बनाया गया, जिसमें तीन नाविकों की जान चली गई। मारे गए लोगों में दो पाकिस्तानी नागरिक और एक इंडोनेशियाई नागरिक शामिल हैं। इस घटना के बाद से अंतरराष्ट्रीय नौवहन और समुद्री व्यापार से जुड़े लोगों में भारी चिंता का माहौल बन गया है, क्योंकि यह रास्ता दुनिया के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों में से एक माना जाता है।

हमले की पूरी जानकारी और हूती विद्रोहियों का दावा

यमन के पास स्थित बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य में हुए इस हादसे के बाद अभी तक किसी भी सरकारी प्रसारक ने टारगेट किए गए जहाज की सटीक पहचान या उसे हुए नुकसान की पूरी रिपोर्ट आधिकारिक तौर पर साझा नहीं की है। हालांकि, हमला करने वाले हूती समूह ने खुले तौर पर इसकी जिम्मेदारी ली है और इस कमर्शियल जहाज को साउदी-लिंक यानी सऊदी अरब से जुड़ा हुआ बताया है। यमन के स्थानीय सूत्रों के हवाले से स्काई न्यूज अरबिया ने जानकारी दी कि जब तटरक्षक बल यानी कोस्ट गार्ड जहाज के चालक दल को बचाने के काम में जुटे थे, ठीक उसी समय एक और मिसाइल दागी गई, जिससे स्थिति और ज्यादा गंभीर हो गई। इस बड़ी घटना को सऊदी के सरकारी चैनल अल हदात और सरकारी प्रसारक अल-जुम्हूरिया टीवी ने प्रमुखता से प्रसारित किया है।

वैश्विक व्यापार और जलमार्गों पर बढ़ता खतरा

ईरान की समाचार एजेंसी तस्नीम ने भी अपने सूत्रों के हवाले से इस बात की पुष्टि की है कि जलडमरूमध्य में एक समुद्री घटना हुई है, जहां यमनी सेना ने एक offending यानी नियमों के विरुद्ध चलने वाले जहाज को निशाना बनाया। इस हमले के बाद से लाल सागर से गुजरने वाले तमाम जहाजों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर वैश्विक स्तर पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हूती विद्रोहियों द्वारा इस तरह के हमलों का एक पुराना पैटर्न रहा है, जो लगातार इस इलाके में व्यापारिक जहाजों और नाविकों की जान के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। गल्फ देशों और भारत के बीच सफर करने वाले या समुद्री मार्ग से व्यापार करने वाले लोगों के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील है, क्योंकि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से माल ढुलाई और यात्रा पर सीधा असर पड़ता है।

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