Gulf of Aden में सऊदी अरब के तेल टैंकर पर मिसाइल हमला, हूती विद्रोहियों ने ली जिम्मेदारी

लाल सागर और अदन की खाड़ी में सुरक्षा की स्थिति एक बार फिर गंभीर हो गई है। यमन के हूती विद्रोहियों ने बुधवार, 5 अगस्त 2026 को सऊदी अरब के तेल टैंकर 'Daisy' को निशाना बनाने का दावा किया है। यह घटना अदन की खाड़ी में हुई, जिसने क्षेत्र में समुद्री व्यापार और तेल की आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इस हमले के बाद से अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने भी अलर्ट जारी कर दिया है।
हमले की पूरी जानकारी
हूती सैन्य प्रवक्ता Yahya Sarea ने एक वीडियो बयान और सोशल मीडिया के जरिए इस हमले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 'Daisy' टैंकर, जो सऊदी अरब की Bihar International कंपनी का है, उस पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया गया। विद्रोहियों का दावा है कि इस हमले के कारण टैंकर को अपना रास्ता बदलना पड़ा और उसे वहां से वापस मुड़ना पड़ा। हूती गुट ने इसे अपनी 'ब्लॉकडे-फॉर-ब्लॉकडे' नीति का हिस्सा बताया है। उनका कहना है कि जब तक यमन के हूती-नियंत्रित क्षेत्रों में नाकाबंदी खत्म नहीं की जाती, तब तक वे सऊदी अरब के तेल जहाजों को निशाना बनाना जारी रखेंगे।
UKMTO और सुरक्षा एजेंसियों का बयान
इस घटना की पुष्टि करते हुए United Kingdom Maritime Trade Operations (UKMTO) ने बताया कि 5 अगस्त 2026 को दोपहर करीब 14:30 UTC पर अदन से लगभग 95 समुद्री मील दक्षिण-पूर्व में एक टैंकर के मास्टर ने एक जोरदार धमाका सुना। हालांकि, अच्छी बात यह रही कि चालक दल पूरी तरह सुरक्षित है और टैंकर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। समुद्री सुरक्षा फर्म Vanguard Tech ने इस जहाज की पहचान 'Daisy' के रूप में की है। ANI News के अनुसार, हूती विद्रोहियों ने उसी दिन एक अन्य सऊदी टैंकर 'Wafa' पर भी हमले का दावा किया है।
क्षेत्र में तनाव का असर
हूती विद्रोहियों के आंकड़ों के अनुसार, 22 जुलाई 2026 से अब तक 8 सऊदी तेल जहाजों को सीधे निशाना बनाया गया है, जबकि 29 तेल जहाजों को अपना मार्ग बदलने या वापस लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा है। सऊदी अरब की ओर से इन हमलों पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। इस बीच, क्षेत्र में सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सऊदी अरब सहित 14 देशों ने हाल ही में एक रक्षात्मक नौसैनिक गठबंधन बनाने का निर्णय लिया है। यह गठबंधन लाल सागर, बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य और अदन की खाड़ी जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए काम करेगा। इस तरह की घटनाओं का सीधा असर समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ता है, जिससे खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों के बीच भी चिंता का माहौल रहता है।