ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म HSBC ने गुरुवार, 16 जुलाई 2026 को भारतीय इक्विटी मार्केट को लेकर अपनी राय बदल दी है। अब इसे ‘अंडरवेट’ से बढ़ाकर ‘न्यूट्रल’ कर दिया गया है। कंपनी का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और भारतीय कंपनियों की बेहतर कमाई की उम्मीदों के कारण बाजार में नई जान आई है। इसके साथ ही, ब्रोकरेज ने साल के अंत तक BSE Sensex के लिए अपना लक्ष्य 80,500 से बढ़ाकर 84,000 कर दिया है।
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बाजार में सुधार की मुख्य वजह
बाजार में इस सकारात्मक बदलाव के पीछे कई कारण हैं। पिछले कुछ समय में Brent crude के दाम अपने अप्रैल के उच्चतम स्तर $126.41 से 33% तक गिर गए हैं, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर दबाव कम हुआ है। साथ ही, जुलाई महीने में विदेशी निवेशकों (FIIs) ने बाजार में $1.6 बिलियन से $1.8 बिलियन के बीच निवेश किया है, जो कि इस साल के शुरुआती महीनों में हुई बड़ी बिकवाली के बाद एक बड़ी राहत की खबर है।
बाजार के लिए चुनौतियां अभी भी बाकी
हालांकि बाजार में सुधार के संकेत हैं, लेकिन HSBC ने आगाह किया है कि अभी भी कुछ जोखिम बरकरार हैं। इनमें महंगाई के कारण खपत कम होना, El Niño का ग्रामीण मांग पर असर और विदेशी निवेश की स्थिरता पर चिंताएं शामिल हैं। ब्रोकरेज ने इन क्षेत्रों के लिए सकारात्मक रुख रखा है:
- प्राइवेट बैंक
- कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी कंपनियां
- रियल एस्टेट
- कमोडिटीज
- चुनिंदा इंडस्ट्रियल स्टॉक्स
वही, सॉफ्टवेयर सर्विस सेक्टर को लेकर ब्रोकरेज ने सावधानी बरतने की सलाह दी है क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े बदलावों को लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है।
