Human Rights Watch (HRW) ने 20 जुलाई 2026 को बांग्लादेश सरकार से Miraj Sheikh नाम के एक मछुआरे के लापता होने की निष्पक्ष जांच करने की अपील की है। 30 साल के मिराज शेख को कथित तौर पर 10 अप्रैल 2026 को Coast Guard के जवानों ने Mongla के पास सुंदरवन इलाके से हिरासत में लिया था। परिवार का कहना है कि उन्हें हिरासत के बाद से मिराज के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।
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हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद जानकारी नहीं
पीड़ित के परिवार ने इस मामले में High Court का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने 12 जुलाई 2026 को सुरक्षा एजेंसियों को 15 दिनों के भीतर मिराज को ढूंढकर पेश करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद, Coast Guard के पश्चिमी जोन के मीडिया अधिकारी Mahbub Hossain ने हिरासत की किसी भी घटना से इनकार किया है। हालांकि, परिवार के वकील Muzahedul Islam Shahin ने चश्मदीदों के हवाले से इसे गलत बताया है।
कानूनों में बदलाव पर उठ रहे सवाल
यह घटना 2024 के विद्रोह के बाद पहली बार हुई लापता होने की रिपोर्ट है। HRW ने BNP सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि पिछली सरकार के दौरान लागू किए गए मानवाधिकार ऑर्डिनेंस को खत्म करना गलत है। Meenakshi Ganguly, जो HRW में डिप्टी एशिया डायरेक्टर हैं, उन्होंने कहा कि संस्थागत सुधार और जवाबदेही के बिना इस तरह की घटनाएं दोबारा हो सकती हैं। नई सरकार ने पहले सुधारों का वादा किया था, लेकिन अब मानवाधिकार आयोग की शक्तियों को सीमित करने वाला नया कानून लाया जा रहा है।
