IAEA के डायरेक्टर जनरल Rafael Grossi ने कन्फर्म किया है कि ईरान के परमाणु ठिकानों की जांच जल्द शुरू होगी। उन्होंने जापान के Fukushima Daiichi परमाणु संयंत्र में पत्रकारों से बात करते हुए यह जानकारी दी। ग्रोसी के मुताबिक यह काम अब तय है और बस सही समय और तारीख तय होने की बात है।
इस पूरी प्रक्रिया के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच पिछले हफ्ते साइन हुआ एक समझौता (MoU) है। Rafael Grossi ने बताया कि इस समझौते में साफ तौर पर लिखा है कि परमाणु सुविधाओं की निगरानी IAEA ही करेगा। यह एक तरह का बीच का रास्ता या अंतरिम समझौता है, जिसे दोनों देशों के बीच विवाद खत्म करने के लिए बनाया गया है। अब अगले 60 दिनों तक दोनों देश परमाणु कार्यक्रम जैसे अहम मुद्दों पर बातचीत करेंगे। इस डील की एक बड़ी शर्त यह भी है कि ईरान को अपने यूरेनियम के भंडार को कम करना होगा।
अमेरिका और ईरान के बयानों में अंतर
भले ही IAEA चीफ ने जांच की पुष्टि कर दी है, लेकिन अमेरिका और ईरान की बातों में फर्क दिख रहा है। दोनों देशों के बीच शब्दों की जंग जारी है:
- अमेरिका का पक्ष: 23 जून 2026 को राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि ईरान लंबी अवधि और उच्च स्तरीय जांच के लिए पूरी तरह राजी हो गया है।
- ईरान का पक्ष: 24 जून को ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने कहा कि परमाणु ठिकानों तक पहुंच का फैसला अमेरिका के साथ होने वाले फाइनल समझौते के बाद ही लिया जाएगा। इससे पहले ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने भी ऐसी किसी जांच से इनकार किया था।
क्यों रुका था काम
बता दें कि IAEA ने 28 फरवरी 2026 को ईरान में अपनी सारी जांच गतिविधियां रोक दी थीं क्योंकि वहां सहयोग नहीं मिल रहा था। 2025 में इजरायल और अमेरिका के साथ हुए 12 दिनों के युद्ध के बाद से ईरान ने एजेंसी को अपने परमाणु साइट्स पर जाने से रोका हुआ था। इस वजह से IAEA यह पता नहीं लगा पा रहा था कि ईरान ने कितना यूरेनियम जमा किया है और वहां की मशीनें कैसे काम कर रही हैं। 10 जून 2026 को IAEA बोर्ड ने एक प्रस्ताव पारित कर ईरान से पूरा सहयोग करने की अपील की थी।
