अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। ग्रॉसी ने साफ कहा है कि साल 2015 का ईरान परमाणु समझौता अब काम करने लायक मॉडल नहीं रह गया है। उनके मुताबिक, ईरान की परमाणु तकनीक और क्षमताएं अब बहुत ज्यादा आगे बढ़ चुकी हैं, इसलिए किसी भी नए समझौते में आज की जमीनी हकीकत और हालिया संघर्षों के असर को शामिल करना बेहद जरूरी होगा।

IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने नए समझौते को लेकर क्या कहा?

राफेल ग्रॉसी ने अल जजीरा इंग्लिश को दिए इंटरव्यू में बताया कि पुराना परमाणु समझौता अब व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी नए समझौते के लिए IAEA एक जरूरी गारंटर की तरह काम करेगा, ताकि समझौते को जमीन पर परखा जा सके। ग्रॉसी के अनुसार, ईरान के पास इस समय 60% तक संवर्धित (enriched) यूरेनियम का बड़ा स्टॉक है, जिसमें से लगभग 200 किलोग्राम से अधिक हिस्सा इस्फहान के एक टनल कॉम्प्लेक्स में सुरक्षित रखा हुआ है। इस यूरेनियम को कहीं और ट्रांसफर करना या इसे कम खतरनाक बनाना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन तकनीकी रूप से यह मुमकिन है। कजाकिस्तान ने इस यूरेनियम को अपने पास रखने की पेशकश भी की है।

अमेरिका और ईरान की शर्तों के बीच कहां फंसा है पेंच?

अमेरिका और ईरान के बीच इस मामले को लेकर स्थिति काफी पेचीदा बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ कर दिया है कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोलने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने जैसी शर्तें रखी हैं। दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई का कहना है कि वे फिलहाल युद्ध को खत्म करने पर ध्यान दे रहे हैं और अमेरिका के साथ किसी भी समझौते के लिए लेबनान में सीजफायर होना पहली और सबसे जरूरी शर्त है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या साल 2015 का ईरान परमाणु समझौता अब भी लागू है?

IAEA चीफ राफेल ग्रॉसी के अनुसार, 2015 का परमाणु समझौता अब व्यावहारिक मॉडल नहीं रह गया है क्योंकि ईरान की परमाणु क्षमताएं और तकनीक अब काफी आगे बढ़ चुकी हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच नए समझौते को लेकर क्या मुख्य शर्तें हैं?

अमेरिका चाहता है कि ईरान कभी परमाणु हथियार न बनाए और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखे, जबकि ईरान की शर्त है कि अमेरिका के साथ किसी भी समझौते से पहले लेबनान में सीजफायर होना चाहिए।