अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA ने ईरान से उसके परमाणु कार्यक्रमों की पूरी जानकारी माँगी है. इस समय ईरान और दुनिया के कुछ देशों के बीच भारी तनाव चल रहा है और दोनों तरफ से बयानों का दौर जारी है. एजेंसी का कहना है कि वह यह पक्का करना चाहती है कि ईरान गुप्त रूप से परमाणु हथियार तो नहीं बना रहा है.
जाँच को लेकर बढ़ा विवाद
IAEA के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने 10 जून 2026 को एक प्रस्ताव पास किया था. इसमें ईरान से अपील की गई कि वह एजेंसी के साथ पूरा सहयोग करे. जून 2025 में यह बात सामने आई थी कि ईरान ने परमाणु सामग्री और गतिविधियों की जानकारी देने में लापरवाही की है. एजेंसी का कहना है कि ईरान अपने नियमों को अपनी मर्ज़ी से बदल या रोक नहीं सकता.
IAEA के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने 26 जून 2026 को साफ़ किया कि ईरान में एक बहुत मज़बूत जाँच सिस्टम होना चाहिए. उन्होंने कहा कि ईरान का यह कहना कि उसके इरादे शांतिपूर्ण हैं, काफी नहीं है बल्कि सबूतों की ज़रूरत है. ग्रॉसी ने यह भी बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच एक शुरुआती समझौता हुआ है जिसके बाद अब बातचीत तेज़ होगी.
समझौता और रुकावटें
अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते में यह बात लिखी है कि IAEA के निरीक्षक ईरान के केंद्रों की जाँच करेंगे. लेकिन ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबबादी ने अलग बात कही है. उनका कहना है कि जाँच तभी होगी जब अंतिम समझौता होगा और ईरान पर लगे प्रतिबंध हटा दिए जाएंगे.
परमाणु क्षमता और पुराना युद्ध
- ईरान ने यूरेनियम को 60% शुद्धता तक पहुँचाया है, जबकि परमाणु बम के लिए 90% शुद्धता चाहिए होती है.
- अनुमान है कि ईरान के पास लगभग 440.9 किलोग्राम 60% शुद्ध यूरेनियम था, जिससे लगभग दस परमाणु हथियार बनाए जा सकते हैं.
- जून 2025 में हुए 12 दिनों के युद्ध में अमेरिका और इसराइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर बमबारी की थी.
- इस हमले के बाद ईरान ने उन ठिकानों पर IAEA की जाँच रोक दी जहाँ बमबारी हुई थी.
राफेल ग्रॉसी ने अप्रैल 2026 में कहा था कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को मिलिट्री हमले से नहीं रोका जा सकता. उन्होंने यह भी साफ़ किया कि फिलहाल ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे लगे कि ईरान बहुत जल्द परमाणु बम बना लेगा.
