IAEA के प्रमुख Rafael Grossi ने ईरान को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ईरान में परमाणु हथियारों को रोकने के लिए एक बहुत मजबूत निगरानी सिस्टम की जरूरत है। उनका मानना है कि सिर्फ बातों से काम नहीं चलेगा और जल्द से जल्द जमीन पर सख्त कदम उठाने होंगे।

Grossi ने जापान में बातचीत के दौरान कहा कि ईरान शांति की बात करता है लेकिन सिर्फ इरादे काफी नहीं होते। इस समय अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़े समझौते को लेकर बातचीत चल रही है और परमाणु कार्यक्रम इस पूरी चर्चा का मुख्य हिस्सा बना हुआ है।

जांच को लेकर खींचतान और नियम

IAEA ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि ईरान ने परमाणु समझौतों (NPT) के नियमों को तोड़ा है। एजेंसी फिलहाल यह पता नहीं लगा पा रही है कि ईरान यूरेनियम कितना बना रहा है या उसके सेंट्रीफ्यूज की क्या हालत है। Grossi ने साफ किया है कि जांच अधिकारियों की साइट्स पर विज़िट होगी, भले ही ईरानी अधिकारी इस पर अलग बात कह रहे हों।

10 जून 2026 को IAEA के बोर्ड ने एक प्रस्ताव पास किया। इसमें ईरान से मांग की गई कि वह अपनी परमाणु सामग्री की पूरी जानकारी दे और जांच अधिकारियों को जरूरी जगहों पर जाने की अनुमति दे। नियम के मुताबिक ईरान अपनी मर्जी से इस समझौते को बंद या बदल नहीं सकता है।

पुराना विवाद और हमले

यह पूरा मामला जून 2025 में शुरू हुआ जब इजराइल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे। उस 12 दिनों के युद्ध के बाद जुलाई 2025 में ईरान ने IAEA के साथ अपना सहयोग बंद कर दिया था।

  • प्रतिबंधित इलाके: IAEA को नतांज़ (Natanz), फोर्डो (Fordow) और इस्फ़हान (Esfahan) जैसे तीन मुख्य ठिकानों पर जाने से रोका गया है।
  • खतरनाक यूरेनियम: रिपोर्ट के अनुसार ईरान के पास 60% तक शुद्ध यूरेनियम है, जो कि आम नागरिक कामों की जरूरत से कहीं ज्यादा है।
  • निगरानी की स्थिति: फरवरी 2026 से IAEA ने ईरान में अपनी ज्यादातर जांच गतिविधियां रोक दी थीं।

अब अमेरिका और ईरान के बीच यूरेनियम के स्टॉक को कम करने या उसे बाहर भेजने पर चर्चा हो रही है, जिसके बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।