वियना में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की बैठक के बीच अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ एक नया प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम की कड़ी आलोचना की गई है और जांचकर्ताओं को अधिक पहुंच देने की मांग की गई है। वहीं ईरान के सरकारी मीडिया का दावा है कि इस प्रस्ताव में उसके परमाणु ठिकानों पर हुए अमेरिकी और इजरायली हमलों पर पूरी तरह चुप्पी साध ली गई है।

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अमेरिका के नए प्रस्ताव में क्या मांग की गई है?

अमेरिका द्वारा तैयार किए गए इस प्रस्ताव में ईरान से मांग की गई है कि वह बिना किसी देरी के अपने परमाणु ठिकानों की पूरी जानकारी IAEA को दे। प्रस्ताव में कहा गया है कि ईरान को जांचकर्ताओं को उन सभी जगहों पर जाने की अनुमति देनी चाहिए जिनकी जांच जरूरी है। हालांकि, कूटनीतिक रास्तों को खुला रखने के लिए इस प्रस्ताव में ईरान के मामले को सीधे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) में भेजने की बात अभी नहीं की गई है, लेकिन सहयोग न करने पर आगे की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

ईरान ने हमलों को लेकर क्या आरोप लगाए हैं?

ईरान के सरकारी मीडिया और वियना में ईरान के मिशन ने इस प्रस्ताव पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान का कहना है कि उसके परमाणु ठिकानों पर लगातार सैन्य हमले हुए हैं, जिसमें जून 2025 और साल 2026 की शुरुआत में इसराइल और अमेरिका द्वारा किए गए हवाई हमले शामिल हैं। ईरान का दावा है कि इन हमलों के कारण ही उसने क्षतिग्रस्त ठिकानों पर जांचकर्ताओं के जाने पर रोक लगाई थी। ईरान के अनुसार, सुरक्षा मानकों और ठिकानों को नुकसान पहुंचाने के बाद अब उन पर दबाव बनाना पूरी तरह से अनुचित है।

IAEA के महानिदेशक ने क्या जानकारी दी है?

IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने बैठक में बताया कि सैन्य संघर्ष के कारण फरवरी 2026 से ईरान में जमीनी स्तर पर जांच का काम पूरी तरह से बंद था। हालांकि, पिछले हफ्ते बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट में कुछ सीमित जांच का काम फिर से शुरू किया गया है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, ईरान के पास लगभग 440.9 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम का भंडार है, लेकिन हालिया हमलों के बाद उसके पास यूरेनियम को संवर्धित करने के लिए कोई चालू सेंट्रीफ्यूज नहीं बचा है। रूस के राजदूत मिखाइल उल्यानोव ने भी चिंता जताई है कि इस प्रस्ताव से स्थिति और ज्यादा बिगड़ सकती है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या इस प्रस्ताव के बाद ईरान का मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जाएगा?

वर्तमान अमेरिकी ड्राफ्ट प्रस्ताव में ईरान के मामले को सीधे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भेजने का सुझाव नहीं दिया गया है। अमेरिका ने कूटनीतिक बातचीत के रास्ते खुले रखने के लिए फिलहाल यह कदम उठाने से परहेज किया है।

ईरान ने परमाणु ठिकानों पर जांचकर्ताओं को जाने से क्यों रोका है?

ईरान का दावा है कि उसके परमाणु ठिकानों जैसे इस्फहान, फोर्डो और नतांज़ पर अमेरिका और इजरायल ने हवाई हमले किए हैं। इन हमलों से हुए नुकसान के बाद सुरक्षा कारणों से ईरान ने कुछ जगहों पर जांचकर्ताओं के जाने पर अस्थायी रोक लगाई है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com