IAEA के डायरेक्टर जनरल राफेल ग्रॉसी ने कहा है कि वह जल्द से जल्द ईरान के परमाणु स्थलों का निरीक्षण करना चाहते हैं। उन्होंने साफ़ किया कि परमाणु ठिकानों की जांच होनी ज़रूरी है और इसके लिए तकनीकी काम शुरू हो चुका है। यह खबर अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक समझौते के बाद सामने आई है।
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राफेल ग्रॉसी ने जापान के फुकुशिमा में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता (MoU) हुआ है। इस समझौते में साफ़ लिखा है कि परमाणु सामग्री और ठिकानों की निगरानी IAEA करेगा। ग्रॉसी ने कहा कि जांच चाहे कल हो या अगले दस दिनों में, यह काम होकर रहेगा।
हालांकि, इस मुद्दे पर अमेरिका और ईरान की बातों में बड़ा अंतर दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का दावा है कि ईरान लंबी अवधि की जांच के लिए तैयार हो गया है। दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बग़ाई और डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर काज़ेम घड़ीबाबादी ने इस बात से साफ़ तौर पर इनकार किया है। ईरान का कहना है कि नुकसान पहुंचे परमाणु ठिकानों तक पहुंच तभी मिलेगी जब अमेरिका के साथ अंतिम समझौता होगा और प्रतिबंध हटाए जाएंगे।
जानकारी के मुताबिक, ईरान में परमाणु निगरानी का काम 28 फरवरी 2026 से पूरी तरह बंद था। जून 2025 में हुए युद्ध के दौरान कई परमाणु साइट्स को नुकसान पहुंचा था, जिनकी जांच अब तक रुकी हुई है। हालांकि, IAEA को बुशेहर परमाणु बिजली संयंत्र जैसे कुछ ठिकानों पर जाने की अनुमति मिली है, लेकिन यूरेनियम संवर्धन केंद्रों के दरवाजे अब भी बंद हैं।
विशेषज्ञों को चिंता है कि ईरान के पास काफी मात्रा में यूरेनियम है, जिसे कुछ जगहों पर 60% तक शुद्ध किया गया है। यह मात्रा परमाणु हथियार बनाने के करीब पहुंच रही है। वहीं, 10 जून 2026 को IAEA के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने एक प्रस्ताव पास किया था, जिसमें ईरान से परमाणु संधि के तहत निगरानी और जांच में पूरा सहयोग करने की अपील की गई थी।
