अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर एक बेहद संवेदनशील रिपोर्ट सदस्य देशों को भेजी है। इस रिपोर्ट में ईरान से तुरंत और पूरी तरह से सहयोग करने की अपील की गई है। पिछले साल ईरान के परमाणु ठिकानों पर हुए हमलों के बाद वहां मौजूद संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) का क्या हुआ, इसकी कोई सटीक जानकारी नहीं मिल पा रही है। IAEA ने साफ कहा है कि परमाणु ठिकानों पर जांच का काम दोबारा शुरू करना अब बेहद जरूरी हो गया है।
आखिर क्यों परेशान है IAEA और क्या है नया अपडेट?
जून 2025 में अमेरिका और इसराइल ने ईरान के नतांज, एस्फ़हान और फ़ोर्डो जैसे प्रमुख परमाणु ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। इन हमलों के बाद से ईरान ने अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों को अपने मुख्य ठिकानों पर जाने की अनुमति नहीं दी है। IAEA का कहना है कि उसे यह नहीं पता चल पा रहा है कि ईरान के पास अब कितना और किस हालत में यूरेनियम बचा हुआ है। हाल ही में 1 से 3 जून 2026 के बीच केवल बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र का ही दौरा किया जा सका था, जबकि बाकी जगहों की स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है।
यूरेनियम स्टॉक को लेकर क्यों मंडरा रहा है खतरा?
साल 2025 के सैन्य हमलों से पहले ईरान के पास लगभग 440 किलोग्राम 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम था, जो परमाणु हथियार बनाने के तकनीकी स्तर के बेहद करीब माना जाता है। IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने साफ किया है कि किसी भी हाल में परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के नियमों को रोका नहीं जा सकता है और ईरान को इसका पालन करना ही होगा। अब इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर 8 जून 2026 को होने वाली IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक में गंभीर चर्चा की जाएगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
IAEA की नई रिपोर्ट में ईरान से क्या मांग की गई है?
IAEA ने ईरान से मांग की है कि वह अपने परमाणु ठिकानों पर पूर्ण निरीक्षण की दोबारा अनुमति दे और पिछले साल हुए हमलों के बाद संवर्धित यूरेनियम की वर्तमान स्थिति का पूरा ब्यौरा साझा करे।
ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले कब और किसने किए थे?
जून 2025 में अमेरिका और इसराइल ने ईरान के नतांज, एस्फ़हान और फ़ोर्डो जैसे परमाणु केंद्रों पर हवाई हमले किए थे, जिसके बाद से वहां पूर्ण निरीक्षण का काम रुका हुआ है।
