अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) ने ईरान द्वारा खाड़ी देशों और जॉर्डन पर किए गए हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। ICAO का कहना है कि ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमले सिविल हवाई यात्रा की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन चुके हैं। सऊदी अरब, UAE और कतर समेत 9 देशों ने इस मामले में मिलकर एक शिकायत पत्र दिया था, जिस पर कार्रवाई करते हुए संगठन ने यह बड़ा फैसला लिया है। इन हमलों की वजह से कई बार विमानों के रास्ते बदलने पड़े हैं, जिससे यात्रियों और एयरलाइंस को काफी परेशानी हुई है।
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हवाई यात्रा पर क्या असर पड़ा और क्यों लिया गया यह फैसला?
ICAO की 237वीं बैठक के दौरान यह प्रस्ताव पास किया गया कि ईरान की हरकतें हवाई यात्रा के नियमों के खिलाफ हैं। नीचे दिए गए कुछ मुख्य बिंदु बताते हैं कि क्या हुआ:
- हमलों की शुरुआत: ईरान ने 28 फरवरी 2026 से मिसाइलों और ड्रोनों का इस्तेमाल कर हमले शुरू किए थे।
- प्रभावित देश: सऊदी अरब, UAE, जॉर्डन, बहरीन, कुवैत, कतर, ओमान, मिस्र और मोरक्को ने इस मुद्दे पर चिंता जताई।
- सुरक्षा जोखिम: बिना किसी चेतावनी के मिसाइल दागने से उन रास्तों पर खतरा बढ़ गया है जहाँ से रोजाना सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय विमान गुजरते हैं।
- फ्लाइट्स पर असर: हमलों के कारण कई बार हवाई क्षेत्र (Airspace) को बंद करना पड़ा, जिससे भारत और दुनिया के अन्य हिस्सों में जाने वाली फ्लाइट्स देरी का शिकार हुईं।
नियमों का उल्लंघन और अधिकारियों के बयान
संगठन ने साफ किया है कि किसी भी देश की हवाई सीमा का सम्मान किया जाना चाहिए और नागरिक उड़ानों को युद्ध का हिस्सा नहीं बनाना चाहिए। इस बारे में महत्वपूर्ण जानकारी इस प्रकार है:
| अधिकारी/देश | मुख्य बात |
|---|---|
| मोहम्मद हबीब (सऊदी अरब) | हवाई सुरक्षा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा, हम विवाद का हिस्सा नहीं हैं। |
| अब्दुल्ला बिन तौक (UAE) | यह फैसला अंतरराष्ट्रीय नियमों को बचाने के लिए जरूरी है। |
| शेख मोहम्मद बिन अब्दुल्ला (कतर) | हवाई सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हम कड़ा जवाब देने को तैयार हैं। |
| कैप्टन दइफल्लाह (जॉर्डन) | देश की हवाई संप्रभुता सर्वोपरि है और इसे नुकसान नहीं पहुँचाया जा सकता। |
ICAO ने इन हमलों को तुरंत रोकने की मांग की है और इस प्रस्ताव को अब संयुक्त राष्ट्र (UN) के संबंधित विभागों को भेजा जाएगा। प्रवासियों और खाड़ी में रहने वाले लोगों के लिए यह खबर राहत भरी हो सकती है क्योंकि हवाई सुरक्षा पर कड़ा रुख अपनाने से भविष्य में उड़ानों में होने वाली रुकावटें कम हो सकती हैं।
