अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस (ICRC) की अध्यक्ष मिर्जाना स्पोलजारिक ने ईरान के परमाणु ठिकानों को मिल रही धमकियों और वहां हो रहे हमलों पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इन ठिकानों को निशाना बनाना न केवल अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है, बल्कि इसके नतीजे आने वाली कई पीढ़ियों के लिए खतरनाक हो सकते हैं। हाल ही में ईरान के बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पास हुए हमलों के बाद पूरी दुनिया की बड़ी संस्थाएं अब अलर्ट पर हैं।
रेड क्रॉस और IAEA ने किन खतरों की दी है चेतावनी?
रेड क्रॉस की अध्यक्ष ने साफ तौर पर कहा है कि युद्ध के दौरान भी कुछ सीमाओं का पालन करना जरूरी है। परमाणु ठिकानों पर हमला करना या ऐसी धमकियां देना किसी भी हाल में सही नहीं है। उन्होंने सरकारों से अपील की है कि वे अपनी बातों और एक्शन में युद्ध के नियमों का सम्मान करें। उनके मुताबिक, कोई भी गलत कदम ऐसे रेडियोधर्मी रिसाव का कारण बन सकता है जिसे सुधारना नामुमकिन होगा।
इसी बीच, अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल ग्रोसी ने भी बुशहर प्लांट के पास हुए धमाकों को लेकर डरा देने वाली रिपोर्ट दी है। उन्होंने बताया कि परमाणु संयंत्र और उसके आसपास के इलाकों को कभी भी युद्ध का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी चेतावनी दी है कि अगर इन ठिकानों पर सीधा हमला होता है, तो इससे बड़े पैमाने पर लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ेगा।
ईरान के परमाणु प्लांट पर अब तक क्या हुआ है?
ईरान के परमाणु ठिकानों को लेकर पिछले कुछ दिनों में कई बड़ी घटनाएं सामने आई हैं, जिसकी जानकारी नीचे दी गई है:
- 4 अप्रैल 2026: बुशहर परमाणु पावर प्लांट के पास एक मिसाइल गिरी जिससे एक कर्मचारी की मौत हो गई।
- हमले की दूरी: सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि यह हमला प्लांट की बाहरी दीवार से मात्र 75 मीटर दूर हुआ था।
- ईरान का पक्ष: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखकर रेडियोधर्मी प्रदूषण के खतरे की चेतावनी दी है।
- रूस की चेतावनी: रूसी कंपनी रोसाटॉम ने मार्च के आखिर में ही बुशहर प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था बिगड़ने की बात कही थी।
- अमेरिकी बयान: रेड क्रॉस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस बयानबाजी का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने तेहरान के खिलाफ कड़े एक्शन की बात कही थी।
इन हमलों और धमकियों की वजह से पूरे खाड़ी क्षेत्र में डर का माहौल है। जानकारों का मानना है कि अगर बुशहर जैसे प्लांट को नुकसान पहुंचता है, तो इसका असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पड़ोसी देशों की हवा और पानी पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
