इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने ग्लोबल ऑयल मार्केट में अब तक के सबसे बड़े संकट की पुष्टि की है। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण कच्चे तेल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस हालात को देखते हुए IEA के 32 सदस्य देशों ने अपने इमरजेंसी रिज़र्व से 400 मिलियन बैरल तेल जारी करने का फैसला किया है। यह कदम हॉर्मुज जलडमरूमध्य में चल रहे विवाद के कारण उठाया गया है।

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खाड़ी देशों में तेल उत्पादन पर क्या असर पड़ा?

इस युद्ध का सीधा असर प्रमुख खाड़ी देशों पर पड़ा है और वहां से तेल का निर्यात रुक गया है। IEA की 12 मार्च की रिपोर्ट के अनुसार, कई देशों में करीब 1 करोड़ बैरल प्रतिदिन तेल का उत्पादन बंद हो गया है। उत्पादन बंदी से प्रभावित होने वाले मुख्य देश इस प्रकार हैं:

  • सऊदी अरब
  • यूएई (UAE)
  • कुवैत
  • कतर
  • इराक

IEA के कार्यकारी निदेशक फतह बिरोल ने जानकारी दी कि कुल मिलाकर ग्लोबल सप्लाई का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा यानी लगभग 2 करोड़ बैरल प्रतिदिन की सप्लाई बाधित हुई है। यह स्थिति 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के कारण और अधिक गंभीर हो गई है।

आम लोगों और प्रवासियों पर इसका क्या प्रभाव होगा?

खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई रुकने का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। इसके अलावा भारत से बड़ी संख्या में लोग सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे देशों में काम करते हैं। इन देशों की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से तेल पर निर्भर करती है। तेल उत्पादन बंद होने या कम होने से इन देशों में काम करने वाले प्रवासियों के रोजगार पर भी असर पड़ने की आशंका है। ग्लोबल मार्केट को स्थिर रखने के लिए IEA ने अपने इतिहास का सबसे बड़ा इमरजेंसी तेल रिज़र्व जारी करने का कदम उठाया है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.