International Energy Agency (IEA) के चीफ Fatih Birol ने चेतावनी दी है कि दुनिया इस समय एक गंभीर ऊर्जा संकट का सामना कर रही है। Strait of Hormuz में चल रहे तनाव और तेल सप्लाई में रुकावट की वजह से दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। इसे देखते हुए IEA ने अपने इमरजेंसी तेल भंडार से और अधिक तेल रिलीज करने की तैयारी कर ली है। एजेंसी ने साफ किया है कि बाजार में तेल की कमी नहीं होने दी जाएगी और जरूरत पड़ने पर दोबारा कदम उठाए जाएंगे।

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आखिर क्यों पड़ी इमरजेंसी तेल निकालने की जरूरत?

Strait of Hormuz का रास्ता आंशिक रूप से बंद होने की वजह से दुनिया भर में तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस रास्ते से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल गुजरता है। Fatih Birol ने टोक्यो में बताया कि जापान के प्रधानमंत्री के अनुरोध के बाद एजेंसी दूसरे दौर का स्टॉक रिलीज करने पर विचार कर रही है। उन्होंने इस स्थिति को 1970 के दशक के तेल संकट से भी ज्यादा गंभीर बताया है क्योंकि इस बार तेल के साथ-साथ गैस का संकट भी जुड़ा हुआ है।

  • IEA के सदस्य देशों ने 11 मार्च को 400 मिलियन बैरल तेल रिलीज करने का ऐतिहासिक फैसला लिया था।
  • एजेंसी के पास अभी भी 80 प्रतिशत इमरजेंसी रिजर्व सुरक्षित है।
  • सप्लाई में आ रही बाधाओं को दूर करना ही वैश्विक अर्थव्यवस्था को बचाने का इकलौता रास्ता है।
  • यह IEA के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा आपातकालीन कदम माना जा रहा है।

कुवैत और अन्य खाड़ी देशों पर संकट का प्रभाव

कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (KPC) के CEO शेख नवाफ सऊद अल-सबा ने मौजूदा हालात पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों के तेल बुनियादी ढांचे पर हमले दुनिया की अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने जैसा है। ईरान और अन्य देशों के बीच चल रहे सैन्य संघर्ष की वजह से कुवैत, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों को अपने उत्पादन में लाखों बैरल की कटौती करनी पड़ी है। इससे न सिर्फ ग्लोबल मार्केट में तेल महंगा हो रहा है बल्कि खाड़ी देशों के प्रोजेक्ट्स पर भी असर पड़ रहा है।

तारीख महत्वपूर्ण घटनाक्रम
11 मार्च 2026 400 मिलियन बैरल तेल रिलीज करने पर सभी 32 सदस्य सहमत हुए
19 मार्च 2026 इमरजेंसी रिजर्व से तेल की पहली खेप बाजार में आनी शुरू हुई
24 मार्च 2026 कुवैत ने तेल सप्लाई में रुकावट को संप्रभुता पर हमला बताया
25 मार्च 2026 IEA चीफ ने टोक्यो में नए सिरे से तेल जारी करने की पुष्टि की

मध्य पूर्व के नौ देशों में अब तक लगभग 40 एनर्जी ठिकानों को नुकसान पहुंचा है जिसमें रिफाइनरी और पाइपलाइन शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आज संघर्ष रुक भी जाए, तो कुवैत जैसे देशों को अपनी पुरानी उत्पादन क्षमता पर वापस लौटने में कम से कम तीन से चार महीने का समय लगेगा। खाड़ी देशों में काम कर रहे प्रवासियों के लिए भी यह चिंता का विषय है क्योंकि ऊर्जा की बढ़ती कीमतें महंगाई को बढ़ा सकती हैं।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com