इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों को कंट्रोल करने के लिए एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। गल्फ क्षेत्र में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने के कारण पूरी दुनिया में तेल का संकट पैदा हो गया था। इस संकट से निपटने के लिए IEA ने अपने इतिहास का सबसे बड़ा स्ट्रैटेजिक ऑयल रिजर्व निकालने का प्रस्ताव रखा है। इस खबर के बाहर आते ही कच्चे तेल के दामों में भारी गिरावट देखी गई है जिससे आम लोगों और मार्केट को बड़ी राहत मिली है।

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कच्चे तेल की कीमतों पर क्या असर हुआ?

इस हफ्ते की शुरुआत में तेल की सप्लाई रुकने के डर से ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमत लगभग 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। लेकिन 11 मार्च 2026 को IEA के इस प्रस्ताव की खबर लीक होने के बाद मार्केट में तेल की कीमतें तेजी से नीचे आईं। ब्रेंट क्रूड के दाम में 15 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई और यह 82 से 87 डॉलर के बीच आ गया। वहीं WTI क्रूड भी गिरकर 88 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है।

कितना तेल निकाला जाएगा और इसके क्या नियम हैं?

IEA के 52 साल के इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा तेल रिजर्व निकालने का प्रस्ताव है। स्पेन की ऊर्जा मंत्री सारा एगेसन ने बताया कि यह 2022 के संकट के दौरान निकाले गए तेल से दोगुना से भी ज्यादा है।

  • इस प्रस्ताव के तहत 182.7 मिलियन बैरल से लेकर 400 मिलियन बैरल तक तेल निकाला जा सकता है।
  • IEA के 32 सदस्य देशों के पास कुल मिलाकर 1.2 बिलियन बैरल पब्लिक रिजर्व और 600 मिलियन बैरल कमर्शियल रिजर्व मौजूद है।
  • इस प्रस्ताव को पास होने के लिए सभी 32 देशों की सहमति जरूरी है। अगर एक भी देश विरोध करता है तो इसमें देरी हो सकती है।
  • सहमति बनने के बाद सदस्य देशों को अपना हिस्सा निकालने के लिए 90 दिनों का समय दिया जाएगा।

गल्फ क्षेत्र के हालात और आगे की तैयारी

IEA के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने बताया कि गल्फ से रुकने वाली सप्लाई की भरपाई के लिए यह रिजर्व 124 दिनों तक काम आ सकता है। होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से रोजाना लगभग 20 मिलियन बैरल तेल की सप्लाई रुक गई है। सऊदी अरामको (Saudi Aramco) ने भी समुद्र के रास्ते की इस परेशानी को देखते हुए अपना क्रूड ऑयल ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए यानबू (Yanbu) की तरफ मोड़ दिया है। इस पूरी स्थिति को संभालने के लिए G7 देशों ने भी इस कदम का समर्थन किया है और चीन और भारत जैसे बड़े देशों के साथ मिलकर काम करने की तैयारी की जा रही है।