IEA Warning: ईरान युद्ध से दुनिया को 13 मिलियन बैरल तेल का नुकसान, Strait of Hormuz बंद होने से बढ़ी टेंशन
ईरान और अमेरिका-इजराइल गठबंधन के बीच चल रहे युद्ध ने पूरी दुनिया में तेल की सप्लाई पर बड़ा असर डाला है। International Energy Agency (IEA) के मुताबिक, इस टकराव की वजह से रोजाना करीब 13 मिलियन बैरल तेल का नुकसान हो रहा है। Strait of Hormuz के लगभग बंद होने से ऊर्जा सुरक्षा का अब तक का सबसे बड़ा खतरा पैदा हो गया है।
तेल की सप्लाई और दुनिया पर क्या असर पड़ा?
International Energy Agency के चीफ फातिह बिरोल ने बताया कि ईरान युद्ध और Strait of Hormuz के बंद होने की कगार पर होने से तेल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। तेल ट्रेडिंग कंपनी Vitol के सीईओ रसेल हार्डी के अनुसार, 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति में 12% की गिरावट आई है। IEA ने अब 2026 के लिए तेल की मांग के अनुमान को भी घटा दिया है, जहाँ पहले 730,000 bpd की बढ़ोत्तरी की उम्मीद थी, अब वहां 80,000 bpd की कमी आने का अनुमान है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कुल तेल का नुकसान | 13 मिलियन बैरल प्रतिदिन (bpd) |
| सप्लाई में कुल गिरावट | 12% |
| युद्ध की शुरुआत | 28 फरवरी 2026 |
| नया डिमांड अनुमान | 80,000 bpd की कमी |
| पुराना डिमांड अनुमान | 730,000 bpd की बढ़ोत्तरी |
| शांति वार्ता की स्थिति | 23 अप्रैल को विफल हुई |
| मुख्य प्रभावित क्षेत्र | Strait of Hormuz |
खाड़ी देशों और प्रवासियों पर इसका क्या प्रभाव है?
इस युद्ध का सबसे ज्यादा असर सऊदी अरब, UAE, इराक, कुवैत और कतर जैसे GCC देशों पर पड़ रहा है। सऊदी अरब और UAE जैसे देशों के पास तेल निर्यात के लिए बहुत सीमित वैकल्पिक रास्ते हैं, जिससे उनके कारोबार पर दबाव बढ़ा है। 23 अप्रैल को जब अमेरिका और ईरान के बीच Strait of Hormuz के नियंत्रण को लेकर शांति वार्ता विफल हो गई, तो तेल की कीमतों में एक बार फिर उछाल देखा गया।
खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से परिवहन और अन्य दैनिक खर्च बढ़ सकते हैं। ऊर्जा बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान और बंदरगाहों की नाकाबंदी ने वैश्विक बाजार में अस्थिरता पैदा कर दी है।