अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने एक बड़ी चेतावनी जारी की है। युद्ध की वजह से दुनिया भर में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की कमी हो सकती है, जिससे कीमतें आसमान छू सकती हैं। यह तनाव 2027 के अंत तक बना रह सकता है, जिसका सीधा असर बिजली और ईंधन के दामों पर पड़ेगा।

गैस की सप्लाई में कमी क्यों आ रही है?

IEA की 24 अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से मध्य पूर्व में हालात खराब हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से दुनिया की करीब 20% गैस सप्लाई बाज़ार से हट गई है। इसके अलावा कतर में गैस बनाने वाले बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है, जिससे सप्लाई बढ़ाने में कम से कम दो साल की देरी होगी।

आम आदमी और बाज़ार पर क्या होगा असर?

मार्च 2026 में एशिया और यूरोप में गैस की कीमतें जनवरी 2023 के बाद सबसे ज़्यादा स्तर पर पहुंच गईं। एजेंसी का अनुमान है कि 2026 से 2030 के बीच करीब 120 बिलियन क्यूबिक मीटर गैस का नुकसान हो सकता है। इस वजह से ऊर्जा महंगी होगी और कई देशों को बिजली बचाने के नए उपाय करने पड़ेंगे।

गैस संकट से जुड़े मुख्य आंकड़े

विवरण प्रभाव और डेटा
बाज़ार तनाव की अवधि 2027 के अंत तक
सप्लाई में कमी करीब 20% (होर्मुज जलडमरूमध्य के कारण)
कुल अनुमानित नुकसान 120 bcm (2026-2030 के बीच)
कीमतों में उछाल जनवरी 2023 के बाद उच्चतम स्तर (मार्च 2026)
सप्लाई में देरी कम से कम 2 साल (कतर प्लांट नुकसान)
Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.