अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने दुनिया को एक बड़े ऊर्जा संकट की चेतावनी दी है। IEA के प्रमुख फातिह बिरोल ने बताया कि वर्तमान तेल और गैस का संकट 1973, 1979 और 2022 के संकटों से भी कहीं अधिक गंभीर है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में तेल के जहाजों का रास्ता रुकने की वजह से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में भारी रुकावट आई है। इसका सीधा असर आम जनता की जेब और जरूरी चीजों की कीमतों पर पड़ने वाला है। खाड़ी देशों से होने वाली सप्लाई रुकने से एशिया और यूरोप के देशों में चिंता बढ़ गई है।

ऊर्जा संकट इतना गंभीर क्यों है?

फातिह बिरोल के अनुसार दुनिया में इस समय प्रतिदिन लगभग 12 मिलियन बैरल तेल की कमी हो रही है। यह कमी 1970 के दशक में आए संकटों से भी दोगुनी है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस गुजरता है, जिसके ब्लॉक होने से सप्लाई चेन पूरी तरह प्रभावित हुई है। अप्रैल का महीना मार्च की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण होने की संभावना है क्योंकि तेल और एलएनजी शिपमेंट में भारी कमी देखी जा रही है।

  • सप्लाई में प्रतिदिन 12 मिलियन बैरल की कमी आई है।
  • डीजल और जेट फ्यूल की कमी सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है।
  • एशिया के बाद अब यूरोप में भी इसका असर दिखने लगेगा।
  • भारत, वियतनाम और थाईलैंड जैसे देश तेल की कमी के कारण अब कोयले का सहारा ले रहे हैं।

आम आदमी और अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?

IEA, IMF और वर्ल्ड बैंक ने मिलकर एक ग्रुप बनाया है ताकि इस आर्थिक झटके को कम किया जा सके। तेल और गैस की कमी से न केवल बिजली महंगी होगी बल्कि खाद की कीमतों में भी बढ़ोतरी होगी। इससे आने वाले समय में खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं। IEA ने अपने आपातकालीन भंडार से 400 मिलियन बैरल तेल जारी किया है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि यह केवल कुछ राहत दे सकता है, असली समाधान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का खुलना ही है।

प्रमुख जानकारी विवरण
सप्लाई संकट का कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रुकावट
सप्लाई में कमी 12 मिलियन बैरल हर दिन
आपातकालीन मदद 400 मिलियन बैरल रिजर्व से जारी
प्रभावित क्षेत्र एशिया, यूरोप और विकासशील देश
Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.