अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अपनी नई रिपोर्ट में साफ किया है कि दुनिया का तेल बाजार भले ही युद्ध के शुरुआती झटकों को झेल गया हो, लेकिन अब हालात चिंताजनक हैं। 15 जुलाई 2026 को जारी रिपोर्ट में अर्थशास्त्रियों Jean-Marc Natal और Azim Sadikov ने बताया कि तेल के सुरक्षित भंडार अब बहुत कम हो गए हैं। युद्ध के बाद कच्चे तेल की कीमतें 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर तो हुई हैं, लेकिन कीमतें अभी भी युद्ध से पहले के मुकाबले 25 फीसदी ज्यादा बनी हुई हैं।
तेल की कमी और भविष्य का खतरा
रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च से मई 2026 के बीच बाजार में हर दिन 40 लाख बैरल तेल की कमी हुई थी, जिसे पुराने भंडारों का इस्तेमाल करके पूरा किया गया। हारमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से दुनिया भर में तेल की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा और करीब 110 करोड़ बैरल कच्चा तेल बाजार तक नहीं पहुंच सका। हालांकि सऊदी अरब और UAE जैसे देशों ने सप्लाई को संभालने की कोशिश की, लेकिन अब चीन समेत कई देशों के कमर्शियल और रणनीतिक भंडार खाली हो चुके हैं।
आम जनता पर क्या होगा असर
IMF की डिप्टी रिसर्च डायरेक्टर Petya Koeva Brooks ने चेतावनी दी है कि अब दुनिया आने वाले किसी भी नए संकट के लिए तैयार नहीं है। IMF ने साल 2026 के लिए वैश्विक विकास दर के अनुमान को घटाकर 3 फीसदी कर दिया है, जबकि महंगाई दर 4.7 फीसदी तक बढ़ने की आशंका है। संस्था ने सरकारों को सलाह दी है कि वे तेल के भंडार फिर से भरें और ईंधन पर दी जाने वाली सब्सिडी के बजाय सीधे जरूरतमंद परिवारों की मदद करें। फिलहाल यह माना जा रहा है कि हारमुज का रास्ता मार्च 2027 तक पूरी तरह से सामान्य हो पाएगा।
