IMF की टीम पाकिस्तान पहुंची है और अब वहां की सरकार पर दबाव बढ़ गया है। IMF ने साफ कहा है कि साल 2026-27 के बजट से पहले पाकिस्तान को मनी लॉन्ड्रिंग और काले धन के रास्तों को बंद करना होगा। खास तौर पर रियल एस्टेट और बैंकिंग सेक्टर में हो रही संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नज़र रखने और उनकी रिपोर्टिंग बेहतर करने को कहा गया है।

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IMF ने पाकिस्तान से किन चीजों पर सुधार मांगा है?

IMF ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि व्यापार के जरिए होने वाली मनी लॉन्ड्रिंग को रोकना होगा। फंड ने कहा कि बैंकिंग और रियल एस्टेट सेक्टर में बहुत सारी संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं, जिन पर सही से निगरानी नहीं रखी जा रही है। सरकार को अब गैर-वित्तीय व्यवसायों, जैसे कि रियल एस्टेट एजेंटों की निगरानी बढ़ानी होगी। साथ ही, कॉर्पोरेट रजिस्ट्री में मालिकाना हक की जानकारी को और सटीक बनाने की बात कही गई है ताकि पता चल सके कि पैसा असल में किसका है।

सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए और क्या है सोलर पैनल घोटाला?

पाकिस्तान सरकार ने IMF को भरोसा दिलाया है कि वह अलग-अलग एजेंसियों के बीच डेटा शेयरिंग को बढ़ाएगी। Federal Board of Revenue (FBR) ने हाउसिंग सोसायटियों में छापेमारी शुरू कर दी है ताकि छिपा हुआ पैसा खोजा जा सके। वहीं, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक कमेटी बनाई है जो उन अधिकारियों पर कार्रवाई करेगी जिन्होंने 70 अरब रुपये के सोलर पैनल घोटाले को नहीं पकड़ा। इस घोटाले में सोलर पैनलों की कीमत बढ़ा-चढ़ाकर दिखाकर पैसा बाहर भेजा गया था।

जरूरी तारीखें और वित्तीय विवरण

इस पूरे मामले से जुड़ी मुख्य जानकारियां नीचे दी गई टेबल में देखी जा सकती हैं:

विवरण जानकारी/तारीख
IMF टीम का पाकिस्तान आगमन 12 मई, 2026
बजट चर्चा की शुरुआत 13 मई, 2026
SBP का मनी लॉन्ड्रिंग फ्रेमवर्क अगस्त 2025
SECP के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव अप्रैल 2026
सोलर पैनल घोटाला राशि 70 अरब रुपये
लक्षित बजट वर्ष 2026-27
IMF मिशन की अवधि लगभग एक सप्ताह

Frequently Asked Questions (FAQs)

IMF ने रियल एस्टेट सेक्टर पर चिंता क्यों जताई है?

IMF का मानना है कि रियल एस्टेट सेक्टर में संदिग्ध वित्तीय लेन-देन बहुत ज्यादा है, लेकिन इसकी रिपोर्टिंग बहुत कम की जा रही है, जिससे काला धन छिपाना आसान हो जाता है।

सोलर पैनल घोटाले में क्या हुआ था?

इस घोटाले में सोलर पैनल के आयात के समय उनकी कीमत जानबूझकर बढ़ाकर दिखाई गई थी, जिसके जरिए करीब 70 अरब रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग की गई।