IMF की चेतावनी: मिडिल ईस्ट युद्ध से बिगड़े आर्थिक हालात, कुवैत समेत 5 देशों की ग्रोथ गिरेगी, बढ़ेंगे दाम

Middle East में चल रहे युद्ध ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है। International Monetary Fund (IMF) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस जंग का असर अब देशों की कमाई और आम लोगों की जेब पर दिखने लगा है। युद्ध की वजह से ट्रेड रूट और एनर्जी मार्केट पूरी तरह प्रभावित हुए हैं, जिससे आने वाले समय में आर्थिक मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

👉: Donald Trump का बड़ा दावा, ईरान और अमेरिका मिलकर निकालेंगे परमाणु कचरा, बमबारी वाली जगहों से होगा रिकवरी

युद्ध से अर्थव्यवस्था में क्या बदलाव आए हैं?

IMF ने बताया कि MENAP रीजन (मिडिल ईस्ट, नॉर्थ अफ्रीका, अफगानिस्तान और पाकिस्तान) की आर्थिक ग्रोथ अब घटकर 1.4 प्रतिशत रह जाएगी। युद्ध की वजह से एनर्जी मार्केट, व्यापारिक रास्तों और बिजनेस के भरोसे को भारी नुकसान पहुँचा है। इस असर से केवल तेल ही नहीं, बल्कि सल्फर और अमोनिया जैसे फर्टिलाइजर की कीमतें भी बढ़ी हैं, जिससे खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं।

प्रमुख आर्थिक आंकड़े और असर

विवरण आंकड़ा / प्रभाव
MENAP क्षेत्र की अनुमानित ग्रोथ (2026) 1.4 प्रतिशत
नेगेटिव ग्रोथ वाले देश ईरान, इराक, कतर, कुवैत और बहरीन
कुवैत की अर्थव्यवस्था में गिरावट (2026) 0.6 प्रतिशत
कुवैत की संभावित रिकवरी (2027) 2.8 प्रतिशत
कुवैत का अनुमानित राजस्व 16.3 अरब दीनार
कुवैत का अनुमानित खर्च 26.1 अरब दीनार
तेल ब्रेक-इवन कीमत (कुवैत) 90.5 डॉलर प्रति बैरल

कुवैत के बजट और भविष्य का क्या हाल है?

कुवैत की अर्थव्यवस्था पर इस युद्ध का सीधा असर पड़ा है। वित्त मंत्री डॉ. याकूब अल-रिफाई के अनुसार, राज्य के बजट में राजस्व 10.5 प्रतिशत कम होकर 16.3 अरब दीनार रह गया है, जबकि खर्च 26.1 अरब दीनार तक जाने का अनुमान है। एनर्जी मार्केट में रुकावट और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान की वजह से यह स्थिति बनी है। हालांकि, अगर ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और तेल उत्पादन सामान्य होता है, तो 2027 तक सुधार की उम्मीद है।