ईरान के साथ चल रहे युद्ध ने पूरी दुनिया की आर्थिक हालत बिगाड़ दी है। IMF की चीफ क्रिस्टालिना जॉर्जेसिया ने चेतावनी दी है कि अगर आज युद्ध रुक भी जाए, तो इसके असर को कम होने में 3 से 4 महीने का समय लगेगा। उन्होंने साफ कहा कि अगर यह लड़ाई 2027 तक खिंची, तो दुनिया की आर्थिक स्थिति और भी खराब हो जाएगी।

तेल की कीमतों और महंगाई का क्या होगा हाल?

IMF चीफ ने बताया कि अगर युद्ध लंबा चलता है, तो कच्चे तेल की कीमत 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकती है। फिलहाल हालात ‘एडवर्स सिनेरियो’ में पहुँच चुके हैं, जहाँ तेल की कीमतें 100 डॉलर के ऊपर बनी हुई हैं। इससे पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ेगी और आर्थिक विकास की रफ़्तार धीमी हो जाएगी।

स्थिति (Scenario) GDP ग्रोथ महंगाई (Inflation) तेल की कीमत
रेफरेंस फोरकास्ट (शॉर्ट वॉर) 3.1% 4.4%
एडवर्स सिनेरियो (वर्तमान) 2.5% 5.4% से ऊपर $100+
सीवियर सिनेरियो (गंभीर) 2% 5.8% $125

दुनिया और एशियाई देशों पर क्या पड़ेगा असर?

हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से तेल बाजार में भारी दिक्कतें आ रही हैं। शेवरॉन के CEO माइक वर्थ ने कहा कि तेल की कमी सबसे पहले एशिया के देशों में महसूस होगी। इसके अलावा, अमेरिकी युद्धपोत USS जॉर्ज बुश इस समय नाकेबंदी में शामिल है, जिससे तनाव और बढ़ गया है।

IMF ने देशों को सलाह दी है कि वे निर्यात पर पाबंदी और कीमतों पर नियंत्रण जैसे एकतरफा कदम न उठाएं। साथ ही केंद्रीय बैंकों को निर्देश दिए गए हैं कि अगर महंगाई बढ़ती है, तो वे ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने के लिए तैयार रहें।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान युद्ध से तेल की कीमतें कितनी बढ़ सकती हैं?

IMF के अनुसार, अगर युद्ध 2027 तक चलता है तो कच्चे तेल की कीमत लगभग 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकती है।

एशियाई देशों पर इस युद्ध का क्या प्रभाव पड़ेगा?

हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के कारण एशिया के देशों में तेल की भौतिक कमी (Physical Shortage) शुरू हो सकती है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com