IMF और World Bank की बैठक खत्म, मिडिल ईस्ट युद्ध से दुनिया की आर्थिक हालत बिगड़ी, ग्रोथ रेट में हुई कटौती
Washington DC में IMF और World Bank की बड़ी बैठक शनिवार को खत्म हो गई। इस पूरी मीटिंग में मिडिल ईस्ट के युद्ध और उसके असर पर सबसे ज़्यादा चर्चा हुई। दुनिया भर के बड़े देशों के प्रतिनिधि यहाँ आए थे जिन्होंने बताया कि युद्ध की वजह से अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा और विकास की रफ्तार धीमी होगी।
दुनिया की आर्थिक रफ्तार पर क्या असर पड़ेगा?
IMF की प्रमुख Kristalina Georgieva ने चेतावनी दी कि युद्ध के कारण दुनिया की आर्थिक ग्रोथ कम होगी। उन्होंने बताया कि बुनियादी ढांचे को नुकसान और सप्लाई चेन में रुकावट आने से हालात खराब हुए हैं। World Bank के अध्यक्ष Ajay Banga ने कहा कि अगर युद्ध और बढ़ा तो ग्लोबल ग्रोथ में 1 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है।
मीटिंग में यह बात सामने आई कि अगर युद्ध तुरंत खत्म भी हो जाता है, तो भी ग्लोबल इकोनॉमी को जो नुकसान हुआ है, वह लंबे समय तक रहेगा। IMF ने अपनी ग्रोथ रिपोर्ट को 3.3 प्रतिशत से घटाकर 3.1 प्रतिशत कर दिया है।
आम आदमी की जेब और महंगाई पर क्या असर होगा?
IEA, IMF और World Bank ने मिलकर एक बयान जारी किया जिसमें बताया गया कि इस युद्ध का असर पूरी दुनिया में अलग-अलग होगा। तेल, गैस और खाद की कीमतें बढ़ने से गरीब देशों और उन देशों को ज़्यादा नुकसान होगा जो बाहर से तेल खरीदते हैं।
इस वजह से आने वाले समय में खाने-पीने की चीज़ों के दाम बढ़ सकते हैं और कई जगह नौकरियों का संकट भी पैदा हो सकता है। IMF ने यह भी कहा कि अगर महंगाई बढ़ती है, तो केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरों में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।
मीटिंग की मुख्य बातें और आंकड़े
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| बैठक की तारीख | 13 अप्रैल से 18 अप्रैल, 2026 |
| बैठक की जगह | Washington D.C. |
| नई ग्लोबल ग्रोथ Forecast | 3.1 प्रतिशत (पहले 3.3 प्रतिशत थी) |
| अनुमानित महंगाई दर | 4.4 प्रतिशत (पहले 3.8 प्रतिशत थी) |
| सबसे ज़्यादा प्रभावित क्षेत्र | तेल आयात करने वाले और कम आय वाले देश |
| G7 में सबसे ज़्यादा असर | ब्रिटेन |