International Maritime Organization (IMO) के सेक्रेटरी-जनरल Arsenio Dominguez ने Strait of Hormuz में कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर चेतावनी दी है. उन्होंने साफ कहा है कि कमर्शियल जहाजों को युद्धपोत (warships) की सुरक्षा देना भी सुरक्षित यात्रा की 100 प्रतिशत गारंटी नहीं है. उन्होंने मिलिट्री मदद को एक लंबा और टिकाऊ समाधान मानने से इनकार किया है. उनका कहना है कि इस तनाव की वजह से समुद्री उद्योग और जहाज पर काम करने वाले नाविक बिना किसी गलती के शिकार हो रहे हैं.

Strait of Hormuz में फंसे जहाजों का हाल

28 फरवरी 2026 को तनाव शुरू होने के बाद से Strait of Hormuz से गुजरने वाले समुद्री ट्रैफिक में लगभग 90 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है. अरब की खाड़ी में इस वक्त करीब 3,000 कमर्शियल जहाज फंसे हुए हैं.

इनमें से लगभग 1,000 जहाज Strait के एंट्री पॉइंट पर ही ब्लॉक हो गए हैं. अब तक कम से कम 19 कमर्शियल जहाजों पर हमले हो चुके हैं, जिनमें 7 नाविकों की जान जा चुकी है.

IMO ने इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि समुद्र में फंसे जहाजों पर काम कर रहे करीब 20,000 नाविकों के पास खाने, पीने के पानी और जरूरी सामान की कमी होने का खतरा बढ़ गया है. इन नाविकों को काफी मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है.

भारत की कूटनीति और अमेरिका का प्लान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा के लिए कई देशों का एक मिलिट्री गठबंधन बनाने की मांग की है. लेकिन जर्मनी, स्पेन, इटली और जापान जैसे देशों ने कानूनी और राजनीतिक कारणों का हवाला देते हुए इस मांग से किनारा कर लिया है.

दूसरी तरफ भारत ने मिलिट्री के बजाय सीधे ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत का रास्ता चुना है. भारतीय विदेश मंत्री के अनुसार इस बातचीत के बाद दो भारतीय गैस टैंकरों को इलाके से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है.

इस पूरे समुद्री और लॉजिस्टिक संकट पर चर्चा करने के लिए IMO काउंसिल ने लंदन में 18 और 19 मार्च 2026 को एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है.

युद्धपोत के साथ भी क्यों बना है खतरा

Strait of Hormuz की बनावट ही इसे काफी खतरनाक बनाती है. यह हिस्सा कम से कम 33 किलोमीटर चौड़ा है, लेकिन जहाजों के गुजरने लायक गहरा पानी का चैनल सिर्फ 4 किलोमीटर (2 नॉटिकल मील) ही है.

ईरान की तरफ मौजूद पहाड़ों की वजह से हमलावरों को जहाजों पर निशाना बनाने में काफी आसानी होती है, जो सुरक्षा दे रहे युद्धपोतों के लिए भी एक चुनौती है.

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्धपोत के साथ जहाजों को ग्रुप (convoy) में भेजा जाता है, तो समुद्री ट्रैफिक काफी धीमा हो जाएगा. यह संकट इसलिए भी बड़ा है क्योंकि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई इसी रास्ते से होती है.

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com