खाड़ी देशों में चल रहे तनाव के बीच इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) ने एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है। अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण समंदर में जहाजों की आवाजाही पर बुरा असर पड़ा है। इस समय करीब 20,000 नाविक (seafarers) खाड़ी के पानी में फंसे हुए हैं या खतरे में हैं। इसी को देखते हुए 18 और 19 मार्च 2026 को लंदन में IMO की 36वीं विशेष बैठक हो रही है।

खाड़ी में जहाजों और नाविकों की वर्तमान स्थिति क्या है?

28 फरवरी से शुरू हुए इस तनाव के बाद से समंदर में काम करने वाले लोगों के लिए खतरा काफी बढ़ गया है। अब तक 11 नाविक अपनी जान गंवा चुके हैं या लापता हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों का निकलना मुश्किल हो गया है। हालांकि 18 मार्च की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने पिछले 48 घंटों में कुछ जहाजों को जाने की अनुमति दी है और आवाजाही थोड़ी बढ़ी है।

तनाव का असर आस-पास के शहरों पर भी दिखने लगा है। 18 मार्च को दुबई के आसमान में मिसाइलों का जलता हुआ मलबा गिरता हुआ देखा गया, जिससे इलाके में समुद्री सुरक्षा और चिंताजनक हो गई है। ओमान की नौसेना भी समंदर में लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है। जेबेल अली (UAE), दम्माम (सऊदी अरब) और हमाद (कतर) जैसे बड़े पोर्ट्स पर जहाजों के लिए वॉर-रिस्क इंश्योरेंस लागू कर दिया गया है।

इमरजेंसी मीटिंग में क्या चर्चा होगी?

स्पेन के मिस्टर विक्टर जिमेनेज इस बैठक की अध्यक्षता कर रहे हैं। इस मीटिंग का मुख्य उद्देश्य समंदर में जहाजों को बिना किसी रोक-टोक के चलने की आजादी (freedom of navigation) सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही आम नागरिक और नाविकों की सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा जाएगा। बैठक में UN और दुनिया भर की बड़ी शिपिंग कंपनियों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं।

IMO के सेक्रेटरी-जनरल आर्सेनियो डोमिंगुएज ने साफ़ कहा है कि नाविकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए और मौजूदा स्थिति बिल्कुल स्वीकार करने लायक नहीं है। इसके अलावा BIMCO जैसी संस्थाओं ने चेतावनी दी है कि अमेरिका या इस्राइल से जुड़े जहाजों पर खतरा ज्यादा है और कभी-कभी गलती से न्यूट्रल जहाजों को भी निशाना बनाया जा रहा है।

महंगाई और सप्लाई चेन पर इसका क्या असर पड़ेगा?

इस तनाव के कारण दुनिया भर की बड़ी शिपिंग कंपनियों जैसे Maersk, MSC, CMA CGM और Hapag-Lloyd ने अपने जहाजों का रास्ता बदल दिया है। अब जहाज केप ऑफ गुड होप से होकर जा रहे हैं, जिसमें ज्यादा समय और पैसा लग रहा है। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब और ग्लोबल मार्केट पर पड़ रहा है।

  • खाड़ी रूट पर माल ढुलाई (freight rates) का खर्च इस महीने 55% तक बढ़ गया है।
  • कच्चे तेल (Brent crude oil) की कीमत 8 मार्च को 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो पिछले चार साल में सबसे ज्यादा है।
  • ईरान की सेना ने चेतावनी दी है कि अगर पश्चिमी देशों की सैन्य गतिविधि जारी रही तो बाजार में भारी उछाल आ सकता है।
Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.