Imran Khan को जेल से लाया गया अस्पताल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हुआ बड़ा बदलाव.

पाकिस्तान के जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री Imran Khan को रावलपिंडी की अडियाला जेल से निकालकर इस्लामाबाद के Shifa International Hospital में भर्ती करा दिया गया है। यह बड़ा कदम गुरुवार, 20 अगस्त 2026 की देर रात उठाया गया, जिससे देश की राजनीतिक हलचल काफी तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने इस संबंध में आदेश जारी किया था, जिसकी अगुवाई Justice Shahid Waheed कर रहे थे। अदालत ने अपने निर्देश में साफ कहा था कि पूर्व प्रधानमंत्री को इलाज के लिए दो दिनों के भीतर अस्पताल पहुंचाया जाए।
अस्पताल ट्रांसफर को लेकर चली कानूनी प्रक्रिया
अदालत के इस आदेश से पहले संघीय सरकार की तरफ से काफी कानूनी दांव-पेच देखने को मिले। सरकार की पहली याचिका सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार ऑफिस ने कागजात पूरे न होने की वजह से वापस लौटा दी थी। इसके बाद सरकार ने अपनी याचिका में सुधार करके दोबारा फाइल किया और तर्क दिया कि पाकिस्तान जेल नियम 1978 के नियम 197 पर ठीक से ध्यान नहीं दिया गया था। संसदीय मामलों के मंत्री Dr. Tariq Fazal Chaudhry ने जानकारी दी कि सरकार इस आदेश को पूरी तरह लागू करना चाहती है। साथ ही सरकार यह भी कानूनी स्पष्टता चाहती है कि क्या यह राहत सिर्फ खान के लिए है या फिर बाकी कैदियों पर भी लागू होगी। उन्होंने यह संकेत भी दिए कि अगर स्थानीय स्तर पर इलाज पूरा नहीं होता है, तो सरकार उन्हें विदेश भेजने पर भी विचार कर सकती है।
राजनीतिक दलों में बढ़ी तनातनी और चेतावनी
गुरुवार को हालात तब और तनावपूर्ण हो गए जब पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी PTI पार्टी ने तय सीमा यानी रात के 11:59 बजे तक आदेश का पालन न होने पर अदालत की अवमानना की याचिका दायर करने की चेतावनी दी। पार्टी के महासचिव Salman Akram Raja का कहना था कि आदेश न मानने का कोई बहाना नहीं चलेगा और खान के वकील Khalid Yousaf Chaudhry ने इसके लिए पूरी तैयारी कर ली थी। दूसरी तरफ, आंतरिक मामलों के राज्य मंत्री Tallal Chaudhry ने इस मामले पर राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि इमरान खान सहानुभूति हासिल करने के लिए कार्ड खेल रहे हैं।
अस्पताल में कड़ी सुरक्षा और खास डॉक्टरों की मौजूदगी
सुप्रमी कोर्ट के अंतरिम निर्देशों के तहत पूर्व प्रधानमंत्री की बहन Dr. Uzma Khan और उनके निजी डॉक्टर Dr. Faisal Sultan को मेडिकल जांच के दौरान वहां मौजूद रहने की अनुमति दी गई है। इन दोनों डॉक्टरों को मेडिकल बोर्ड में भी शामिल किया गया है। जैसे ही पूर्व प्रधानमंत्री अस्पताल पहुंचे, वहां की सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई। पुलिस और रेंजर्स ने अस्पताल के चारों तरफ मोर्चा संभाल लिया और आम लोगों के आने-जाने पर रोक लगा दी गई ताकि किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके।