भारत ने श्रीलंका में विकास कार्यों के लिए अपनी मदद का दायरा और बढ़ा दिया है। भारतीय उच्चायुक्त संतोष झा ने 31 जुलाई 2026 को जानकारी दी कि भारत की कुल सहायता अब 7.5 बिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर गई है। यह मदद श्रीलंका के सभी 25 जिलों में चल रही विकास परियोजनाओं में इस्तेमाल की जा रही है।
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स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर जोर
इस सहायता में 850 मिलियन डॉलर से अधिक की राशि अनुदान के रूप में दी गई है। हाल ही में, 14 जुलाई 2026 को देनियाया बेस अस्पताल के लिए 600 मिलियन श्रीलंकाई रुपये (SLR) का अनुदान समझौता हुआ है। इस राशि का उपयोग अस्पताल के लिए जरूरी मेडिकल उपकरण खरीदने में किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट आपदा प्रबंधन के तहत अस्पताल को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने की योजना का हिस्सा है, जिसे अगले तीन साल में पूरा किया जाना है।
भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति
भारत की यह मदद श्रीलंका के कठिन समय, खास तौर पर 2022 के आर्थिक संकट के दौरान और अधिक काम आई है। उस दौरान भारत ने श्रीलंका को ईंधन, दवाइयां और खाने-पीने की जरूरी चीजों की आपूर्ति सुनिश्चित की थी। भारतीय उच्चायुक्त ने 21 जुलाई 2026 को कोलंबो प्लान की नई महासचिव चुलामनी चार्टसुवान के साथ मुलाकात में क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को जारी रखने पर भी चर्चा की है। यह पूरा सहयोग भारत की ‘पड़ोसी पहले’ और ‘महासागर’ नीति के तहत श्रीलंका के साथ मजबूत होते रिश्तों को साफ तौर पर दिखाता है।
