भारत सरकार ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध के हालातों को देखते हुए 25 मार्च को शाम 5 बजे एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में सभी राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं को बुलाया गया है ताकि मौजूदा संकट और भारत पर इसके संभावित असर पर विस्तार से बात की जा सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और सरकार ने इसे काफी चिंताजनक बताया है।

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संकट को लेकर सरकार की बड़ी बैठकें और कार्यक्रम

पश्चिम एशिया के हालातों को देखते हुए पिछले कुछ दिनों से लगातार हाई-लेवल मीटिंग्स हो रही हैं। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि देश की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर इसका कम से कम असर पड़े। नीचे दी गई तालिका में हाल की गतिविधियों का विवरण दिया गया है:

तारीख बड़ी घटना और मीटिंग
22 मार्च 2026 PM मोदी ने सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की बैठक ली।
23 मार्च 2026 PM ने लोकसभा में हालात को चिंताजनक बताया और ऊर्जा सुरक्षा पर चिंता जताई।
24 मार्च 2026 रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश की रक्षा तैयारियों की समीक्षा की।
25 मार्च 2026 शाम 5 बजे सभी दलों के साथ मुख्य बैठक का आयोजन।

आम आदमी और प्रवासियों के लिए सरकार की रणनीति

  • ऊर्जा सुरक्षा: सरकार पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई बनाए रखने के लिए दूसरे देशों से भी बातचीत कर रही है।
  • प्रवासियों की सुरक्षा: खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया में रहने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा सरकार की पहली प्राथमिकता है।
  • जरूरी सामान: खाने-पीने की चीजों और खाद की कमी न हो, इसके लिए अलग-अलग मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं।
  • जमाखोरी पर लगाम: राज्य सरकारों को निर्देश दिए गए हैं कि वे कालाबाजारी और जमाखोरी को रोकने के लिए सख्त कदम उठाएं।

व्यापार और बिजली आपूर्ति पर सरकार का ध्यान

व्यापारिक रास्तों, खासकर Strait of Hormuz में हो रही दिक्कतों के कारण भारत के आयात-निर्यात पर असर पड़ सकता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पावर प्लांट्स में कोयले का स्टॉक पर्याप्त है, इसलिए बिजली संकट जैसी स्थिति नहीं आएगी। भारत लगातार शांति और बातचीत की वकालत कर रहा है, लेकिन साथ ही अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। विभिन्न मंत्रालय जैसे पेट्रोलियम, वाणिज्य और कृषि विभाग मिलकर इस संकट से निपटने की योजना पर काम कर रहे हैं।