पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत सरकार ने एक बार फिर सभी पक्षों से शांति बनाए रखने और बातचीत के जरिए मामला सुलझाने की अपील की है। लेबनान में इजराइल की सैन्य कार्रवाई तेज होने और ईरान द्वारा अमेरिका के साथ शांति वार्ता स्थगित करने के फैसले के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। भारत के विदेश मंत्रालय ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरी चिंता जताई है और खाड़ी देशों में काम करने वाले करीब 1 करोड़ भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया है।

भारत सरकार का इस पूरे मामले पर क्या स्टैंड है?

भारत लगातार कूटनीति और बातचीत के जरिए शांति बहाल करने की मांग कर रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इस बात को दोहराया है कि सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए, नागरिकों की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए और देशों की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए।

  • प्रवासियों की सुरक्षा: खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले करीब 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा सरकार के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।
  • सफलतापूर्वक वापसी: विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि तनाव बढ़ने के बाद से अब तक 2,361 भारतीय नागरिकों को ईरान से सुरक्षित वापस भारत लाया जा चुका है।
  • शांति प्रयासों का समर्थन: भारत ने इससे पहले इजराइल और लेबनान के बीच संघर्ष विराम के कदमों का स्वागत किया था।

ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत क्यों रुकी?

ईरान ने 1 जून 2026 को अमेरिका के साथ चल रही शांति वार्ता को औपचारिक रूप से निलंबित करने की घोषणा की है। ईरान का आरोप है कि इजराइल लगातार लेबनान में सैन्य हमले कर रहा है और अमेरिका इस पर सही कदम नहीं उठा रहा है। इस संबंध में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य इस प्रकार हैं:

  • वार्ता निलंबन: ईरान की तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार, तेहरान ने मध्यस्थों के जरिए होने वाली बातचीत को रोक दिया है।
  • इजराइल का रुख: इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने साफ तौर पर कहा है कि लेबनान में कोई युद्धविराम नहीं हुआ है और कार्रवाई जारी रहेगी।
  • अमेरिका का बयान: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले कहा था कि दोनों पक्ष तनाव कम करने पर सहमत हुए हैं, लेकिन जमीनी हालात इसके उलट दिख रहे हैं।

जमीनी स्तर पर क्या हैं ताजा हालात?

लेबनान और इजराइल के बीच सीमा पर संघर्ष तेज हो गया है। 2 जून 2026 को लेबनान में हुए इजराइली ड्रोन हमलों में आठ लोगों की जान चली गई है। दूसरी तरफ, हिजबुल्लाह के ड्रोन हमलों में एक इजराइली सैनिक की मौत हुई है और कई घायल हुए हैं। इसके साथ ही ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात को प्रभावित करने की चेतावनी दी है, जिससे व्यापारिक जहाजों की आवाजाही पर संकट मंडरा रहा है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा के लिए भारत सरकार क्या कर रही है?

विदेश मंत्रालय स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। अब तक संकटग्रस्त क्षेत्रों से 2,361 से अधिक भारतीयों को सुरक्षित निकाला जा चुका है और करीब 1 करोड़ प्रवासियों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है।

ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता रुकने का क्या कारण है?

ईरान ने लेबनान में इजराइल की लगातार बढ़ती सैन्य कार्रवाई और वाशिंगटन द्वारा बातचीत को खींचने का आरोप लगाते हुए 1 जून 2026 को वार्ता निलंबित कर दी है।