भारत में सीमेंट बनाने वाली कंपनियों के लिए आने वाला समय मुश्किल भरा हो सकता है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों की वजह से इन कंपनियों के मुनाफे पर बुरा असर पड़ने वाला है। Crisil की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल कंपनियों के मार्जिन में 200 बेसिस पॉइंट तक की बड़ी कमी आ सकती है।

सीमेंट कंपनियों के मुनाफे पर असर क्यों पड़ रहा है?

ऊर्जा की कीमतें बढ़ने से उत्पादन की लागत काफी बढ़ गई है। कच्चा तेल, पेट कोक और थर्मल कोयले के दाम बढ़ने से बिजली और ईंधन का खर्चा 10 से 12 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इसके अलावा, पैकेजिंग और माल ढुलाई के खर्चों में भी बढ़ोतरी हुई है, जिससे कंपनियों की कुल लागत 4 से 6 प्रतिशत तक बढ़ गई है।

लागत और निवेश का पूरा ब्यौरा क्या है?

मार्केट एक्सपर्ट्स और विभिन्न संस्थाओं ने सीमेंट सेक्टर की मौजूदा स्थिति पर कुछ अहम आंकड़े दिए हैं, जिन्हें नीचे दी गई टेबल में देखा जा सकता है:

विवरण संभावित असर/आंकड़ा
मार्जिन में गिरावट 150-200 बेसिस पॉइंट
ईंधन और पावर खर्च 10-12% की बढ़ोतरी
कुल उत्पादन लागत 4-6% की वृद्धि
ब्रेंट क्रूड ऑयल दाम 82-87 डॉलर प्रति बैरल
कीमतों में बढ़ोतरी की कोशिश 15-30 रुपये प्रति बैग
कुल निवेश (CapEx) 1.2 लाख करोड़ रुपये
नई क्षमता विस्तार 140-150 मिलियन टन (FY28 तक)

क्या सीमेंट के दाम बढ़ेंगे?

लागत बढ़ने के कारण कंपनियों ने सीमेंट के दाम 15 से 30 रुपये प्रति बैग बढ़ाने की कोशिश की है। लेकिन बाजार में सीमेंट की ज्यादा सप्लाई और कंपनियों के बीच मुकाबले की वजह से इन कीमतों को टिकाए रखना मुश्किल हो रहा है। कई जगहों पर कंपनियों को अपने बढ़ाए हुए दाम वापस घटाने पड़े हैं। अब कंपनियां अपनी लागत कम करने के लिए अक्षय ऊर्जा और नए प्रोजेक्ट्स पर पैसा खर्च कर रही हैं।