Strait of Hormuz में चल रहे तनाव और तेल सप्लाई में रुकावटों के बीच भारत और चीन जैसे बड़े देशों ने कच्चे तेल के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाशने शुरू कर दिए हैं। भारतीय रिफाइनरियों ने मध्य पूर्व के देशों पर अपनी निर्भरता कम करते हुए ब्राजील और अन्य लैटिन अमेरिकी तथा अफ्रीकी देशों से कच्चे तेल का आयात काफी बढ़ा दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि राजनैतिक रूप से सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध विकल्पों की तलाश अब इन देशों की बड़ी जरूरत बन चुकी है।

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भारत ने कच्चे तेल के लिए किन देशों से बढ़ाया आयात?

भारतीय रिफाइनरियों ने मध्य पूर्व से होने वाली तेल सप्लाई में रुकावट के बाद अपनी रणनीति में बदलाव किया है। व्यापारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत ने ब्राजील, वेनेजुएला, अंगोला और नाइजीरिया जैसे देशों से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी है। रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी भारतीय रिफाइनरियां इन नए बाजारों से तेल मंगा रही हैं।

  • रूस अभी भी भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है, जिसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब का नंबर आता है।
  • मई 2026 में वेनेजुएला के भारत का चौथा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बनने की संभावना है।
  • भारत ने पिछले महीने इराक से कच्चे तेल का आयात अस्थायी रूप से रोक दिया था, हालांकि अमेरिकी छूट के तहत ईरान से सीमित मात्रा में तेल की खरीद फिर से शुरू की गई है।

Strait of Hormuz के बंद होने से क्या हैं मुश्किलें?

Strait of Hormuz वैश्विक तेल व्यापार के लिए एक बेहद संवेदनशील जलमार्ग है। यॉर्क यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर इलान कपूर के अनुसार, पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था इस तरह के संवेदनशील रास्तों पर निर्भर है और यहाँ लंबे समय तक रुकावट रहने से पूरी दुनिया में ऊर्जा, भोजन और जीवन-यापन का संकट बढ़ सकता है।

यूएई की सरकारी तेल कंपनी एडनॉक (Adnoc) के सीईओ ने बताया कि अगर आज भी तनाव खत्म हो जाता है, तो तेल सप्लाई को पुराने स्तर के 80 प्रतिशत तक वापस लाने में कम से कम चार महीने का समय लगेगा। वहीं पूरी क्षमता बहाल होने में साल 2027 के शुरुआती या दूसरे भाग तक का समय लग सकता है।

क्या बातचीत से निकलेगा कोई समाधान?

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि Strait of Hormuz को दोबारा खोलने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है और जल्द ही किसी समझौते की घोषणा हो सकती है। हालांकि, ईरान की ओर से कहा गया है कि कई बिंदुओं पर सहमति तो बन गई है लेकिन अमेरिकी रुख में लगातार बदलावों के कारण समझौता तुरंत होना संभव नहीं दिख रहा है।

खाड़ी देशों में केवल सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के पास ही ऐसे वैकल्पिक मार्ग हैं जो Strait of Hormuz को बायपास कर सकते हैं। कुवैत, इराक, कतर और बहरीन जैसे देश पूरी तरह से इसी समुद्री रास्ते पर निर्भर हैं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

भारत को खाड़ी देशों के बजाय अन्य देशों से तेल क्यों खरीदना पड़ रहा है?

Strait of Hormuz में जारी तनाव और समुद्री यातायात पर लगी पाबंदियों के कारण मध्य पूर्व से तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। इस कारण भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए ब्राजील और वेनेजुएला जैसे वैकल्पिक देशों से तेल खरीद रहा है।

क्या खाड़ी देशों के पास Strait of Hormuz के अलावा कोई और रास्ता है?

संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के पास वैकल्पिक पाइपलाइन मार्ग हैं जो Strait of Hormuz को बायपास कर सकते हैं, लेकिन कुवैत, इराक, कतर और बहरीन तेल निर्यात के लिए पूरी तरह इसी जलमार्ग पर निर्भर हैं।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.