वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है। Confederation of Indian Industry (CII) ने चेतावनी दी है कि ईंधन, खाद और खाने की कीमतों में एक साथ बढ़ोतरी का जोखिम बढ़ गया है। CII ने सरकार से अपील की है कि इन तीनों चुनौतियों से निपटने के लिए एक साझा नेशनल स्ट्रेटजी बनाई जाए ताकि महंगाई को कंट्रोल किया जा सके।

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भारत की निर्भरता और रिस्क क्या है?

CII के डायरेक्टर जनरल Chandrajit Banerjee ने बताया कि ईंधन, खाद और भोजन एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। ईंधन की कीमत बढ़ने से खाद महंगी होती है और खाद महंगी होने से खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ जाते हैं। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से मंगवाता है, जिससे वैश्विक संकट के समय रिस्क बढ़ जाता है।

नीचे दी गई टेबल में भारत की निर्भरता और सप्लाई से जुड़े आंकड़े दिए गए हैं:

आइटम / विवरण आंकड़ा / मात्रा
कच्चा तेल (Crude Oil) आयात लगभग 88%
फॉस्फेट्स (Phosphates) आयात लगभग 90%
यूरिया (Urea) आयात लगभग 25%
खाद प्लांट के लिए गैस सप्लाई (रिकवर) 97%
यूरिया आयात (Tenders के जरिए) 25 लाख टन
DAP खाद आयात 13.5 लाख टन
NPK खाद आयात 7 लाख टन
शुरुआती खाद स्टॉक (1 अप्रैल 2026) 1.8 करोड़ टन

सरकार ने सप्लाई बचाने के लिए क्या कदम उठाए?

भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कन्फर्म किया है कि पेट्रोल, डीजल, LPG और प्राकृतिक गैस की सप्लाई स्थिर है। रिफाइनरियों में काम सामान्य रूप से चल रहा है और देशभर के पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कोई कमी नहीं है।

  • गैस सप्लाई: खाद बनाने वाली फैक्ट्रियों के लिए गैस की उपलब्धता जो संघर्ष की शुरुआत में 65% रह गई थी, उसे बढ़ाकर 97% कर दिया गया है।
  • खाद की तैयारी: खरीफ सीजन 2026 की जरूरत 3.9 करोड़ टन है, जिसके लिए सरकार ने पहले ही 1.8 करोड़ टन का स्टॉक जमा कर लिया था।
  • वैकल्पिक रास्ते: Strait of Hormuz के बाहर से खाद मंगवाने के नए रास्ते खोजे गए हैं ताकि सप्लाई चेन न टूटे।

महंगाई रोकने के लिए CII ने क्या सुझाव दिए?

CII ने सरकार को लंबी अवधि के लिए कुछ जरूरी बदलाव करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि भारत को तेल के लिए दूसरों पर निर्भरता कम करनी होगी।

  • ईंधन सुरक्षा: पेट्रोल में इथेनॉल के मिश्रण को बढ़ाना, फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों का इस्तेमाल बढ़ाना और LNG ट्रक कॉरिडोर बनाने का सुझाव दिया गया है।
  • एनर्जी विकल्प: घरेलू तेल और गैस की खोज तेज करने, बायो-CNG और परमाणु ऊर्जा में निवेश बढ़ाने की बात कही गई है।
  • खाद और भोजन: खाद सब्सिडी के लिए Direct Benefit Transfer (DBT) मॉडल अपनाने और प्याज व टमाटर के बफर स्टॉक को समय पर बाजार में उतारने की सलाह दी गई है ताकि जमाखोरी रुक सके।

Frequently Asked Questions (FAQs)

वेस्ट एशिया संकट का भारत में खाने-पीने की चीजों पर क्या असर पड़ सकता है?

वेस्ट एशिया संकट से ईंधन महंगा होता है, जिससे खाद की कीमत बढ़ती है और अंत में खेती की लागत बढ़ने से अनाज और सब्जियों के दाम बढ़ सकते हैं।

क्या भारत में खाद की कमी होने की संभावना है?

नहीं, सरकार ने खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त तैयारी की है। 1.8 करोड़ टन का शुरुआती स्टॉक मौजूद था और ग्लोबल टेंडर के जरिए यूरिया, DAP और NPK की बड़ी मात्रा मंगवाई गई है।