पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव ने दुनिया भर में ऊर्जा और ईंधन की सप्लाई को प्रभावित किया है। इस संकट को देखते हुए भारत सरकार ने देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। कोयला सचिव विक्रम देव दत्त ने 28 मई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में बताया कि भारत अब घरेलू कोयले को गैस में बदलने यानी कोल गैसिफिकेशन की तकनीक पर तेजी से काम कर रहा है। सरकार का लक्ष्य विदेशी आयात पर अपनी निर्भरता को कम करना है ताकि देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।

पश्चिम एशिया संकट और भारत की आयात पर निर्भरता

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए विदेशों पर बहुत ज्यादा निर्भर है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ईंधन की सप्लाई बाधित होने का खतरा हमेशा बना रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 मई 2026 को अपनी कैबिनेट को निर्देश दिया था कि वे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की खोज में तेजी लाएं। भारत फिलहाल कई महत्वपूर्ण गैसों और खादों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है।

भारत की आयात निर्भरता को इस तालिका के जरिए आसानी से समझा जा सकता है:

उत्पाद का नाम आयात की हिस्सेदारी
एलएनजी (LNG) 50% से अधिक
अमोनिया (Ammonia) लगभग 100%
मेथनॉल (Methanol) 80% से 90%
यूरिया (Urea) लगभग 20%

वित्त वर्ष 2025 में इन उत्पादों को आयात करने में भारत को लगभग 2.77 लाख करोड़ रुपये खर्च करने पड़े थे। कोयला गैस के जरिए इन उत्पादों का निर्माण देश के भीतर ही किया जा सकेगा, जिससे सरकारी खजाने को भारी राहत मिलेगी।

कोयला गैसीकरण के लिए सरकार की 37,500 करोड़ रुपये की योजना

केंद्र सरकार ने कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है। केंद्रीय कैबिनेट ने 21 मई 2026 को इस क्षेत्र के लिए 37,500 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी थी। इस योजना के तहत सरकार का लक्ष्य साल 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले को गैस में बदलने का है।

इस बड़े प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए सरकार ने नियमों में भी बदलाव किया है। नॉन-रेगुलेटेड सेक्टर के तहत कोयला लिंकेज की अवधि को बढ़ाकर 30 साल कर दिया गया है। इससे निवेशकों को लंबे समय के लिए नीतिगत सुरक्षा मिलेगी। इस योजना में कोल इंडिया, भेल, इंडियन ऑयल, गेल, बीपीसीएल और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी बड़ी कंपनियां काम कर रही हैं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

भारत सरकार की कोयला गैसीकरण योजना का मुख्य लक्ष्य क्या है?

इस योजना का मुख्य लक्ष्य साल 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले को गैस में बदलना है, ताकि विदेशों से आयात होने वाली महंगी गैस, अमोनिया और यूरिया पर भारत की निर्भरता को खत्म किया जा सके।

सरकार इस योजना के लिए कितना बजट दे रही है और नियमों में क्या ढील दी गई है?

सरकार इस योजना के लिए 37,500 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन दे रही है। इसके साथ ही निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कोयला लिंकेज की अवधि को बढ़ाकर 30 साल कर दिया गया है।