पश्चिम एशिया में कमर्शियल जहाजों पर हो रहे हमलों ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। भारत ने भी इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई है और सभी देशों से अपील की है कि वे तनाव कम करें और आम लोगों की सुरक्षा का ध्यान रखें। बाहरी मामलों के मंत्रालय (MEA) ने साफ कहा है कि तेल और व्यापार की सप्लाई में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए।
यह पूरा मामला मंगलवार, 7 जुलाई को तब और बिगड़ गया जब Strait of Hormuz में तीन टैंकरों पर मिसाइल हमले हुए। इसके तुरंत बाद अमेरिका ने ईरान में 80 से ज़्यादा जगहों पर हमले किए। खबरों के मुताबिक, इस हमले में कतर के एक LNG टैंकर और सऊदी अरब के एक कच्चे तेल के टैंकर को नुकसान पहुँचा है।
सुरक्षा कारणों से कई जहाजों ने अपना रास्ता बदल लिया है। इनमें कतर के तीन LNG टैंकर और भारत का एक कच्चा तेल ले जाने वाला जहाज शामिल था। ब्रिटेन की समुद्री व्यापार संस्था (UKMTO) ने खतरे का स्तर severe यानी गंभीर कर दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच युद्धविराम अब खत्म हो गया है। वहीं दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया है और बदला लेने की चेतावनी दी है। इस तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें काफी बढ़ गई हैं, जिसका असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।
भारत ने इस मुद्दे पर अपनी पुरानी बात दोहराते हुए कहा कि बातचीत और डिप्लोमेसी से ही शांति संभव है। भारत के राजदूत Parvathaneni Harish ने 11 जून 2026 को UN सुरक्षा परिषद में भी यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि दुनिया भर के समुद्री जहाजों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा सबसे ज़रूरी है।
